रहतना के जंगल में रविवार की पूर्वाह्न 11 बजे लग गई थी भीषण आग
सूचना के डेढ़ घंटे बाद पहुंचे वन कर्मी, आग बुझाने में जुटे रहे किसान
रास्ता न होने से नहीं पहुंच सकी दमकल गाड़ी, पैदल ही पहुंचे कर्मी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिनौली (बागपत)। बरनावा वन्य क्षेत्र के रहतना गांव के जंगल में रविवार की पूर्वाह्न 11 बजे अचानक आग लग गई। आरोप है कि सूचना के डेढ़ घंटे बाद भी वन कर्मी मौके पर नहीं पहुंचे। तब तक आसपास खेतों में काम करने वाले किसानों ने आग बुझाने का प्रयास किया। सूचना पर पहुंची दमकल गाड़ी भी रास्ता न होने के कारण मौके पर नहीं पहुंच सकी। दमकल कर्मी पैदल ही मौके पर पहुंचे और करीब पांच घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। मगर, तब तक काफी वन संपत्ति जलकर राख हो गई।
रहतना गांव के जंगल में रविवार की पूर्वाह्न तकरीबन ग्यारह बजे अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने भीषण रूप धारण कर लिया। आग की लपटों को देख आसपास के खेतों में काम कर रहे किसान मौके पर पहुंचे और इसकी सूचना वन क्षेत्राधिकारी राजपाल और दमकल विभाग का दी। आरोप है कि सूचना के डेढ़ घंटे बाद वन कर्मी मौके पर पहुंचे, तब तक किसान ही आग को बुझाने में जुटे रहे। किसानों ने उन्हें खरीखोटी भी सुनाई। सवा दो बजे दमकल कर्मी मौके पर पहुंचे, लेकिन रास्ता न होने के कारण उनका वाहन मौके पर नहीं पहुंचे सका। पैदल ही फायर कर्मी मौके पर पहुंचे और आग को बुझाने मेें जुट गए। करीब पांच घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका।
पहले भी कई बार लग चुकी है आग
20 दिन पहले भी रंछाड और रहतना गांव के जंगल में आग लग गई थी, लेकिन सूूचना के बाद भी किसी ने सुध नहीं ली। आग में दर्जनों पेड़ जलकर नष्ट हो गए थे। गत वर्ष भी दादरी, बरनावा सहित संतनगर नर्सरी के आसपास क्षेत्र में आग लगी थी। उस वक्त भी किसानों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया था।
कम होता जा रहा वन क्षेत्र
बिनौली। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार बरनावा वन्य क्षेत्र का रकबा लगभग 126 हेक्टेयर है। वन कर्मियों की लापरवाही, आगजनी व अवैध कटान के कारण लगातार घटता जा रहा है। इस समय लगभग 124 हेक्टेयर के लगभग ही वन क्षेत्र बचा हुआ है।
डीएफओ लेते रहे पल-पल की जानकारी
डीएफओ हेमंत सेठ ने बताया कि आग लगने की सूचना पर वन कर्मियों को मौके पर भेज दिया गया था। पांच घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। पल-पल की जानकारी मै खुद लेता रहा। आग से जंगल में ज्यादा हानि नही हुई। नीचे पड़े सूखे पत्तों में आग लगी थी।