चकबंदी में आठ बीघा जमीन के गलत बंटवारे से आहत होकर जहरीला पदार्थ खाने वाले बामनौली गांव के किसान की उपचार के दौरान मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद जैसे ही शव गांव में पहुंचा ग्रामीणों ने अंतिम संस्कार से इंकार कर दिया। ग्रामीणों ने चकबंदी के अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की। पुलिस ने ग्रामीणों को बामुश्किल समझा-बुझाकर शांत किया। इसके बाद गमगीन माहौल में किसान का अंतिम संस्कार किया।
बामनौली गांव में पिछले वर्ष पूरी हुई चकबंदी प्रक्रिया को लेकर किसान अब तक भी अफसरों के चक्कर काट रहे हैं। आठ बीघा जमीन के किसान कृष्णपाल (45) पुत्र अजब सिंह ने सोमवार को दुखी होकर जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया था। परिजन गंभीर हालत में उसे लेकर सीएचसी बड़ौत पहुंचे।
इसके बाद किसान को गंभीर हालत में मेरठ रेफर किया । सोमवार की रात में उसकी मेरठ में मौत हो गई। किसान की मौत से गांव में गम का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने कहा प्रशासन की अनदेखी से किसान जान देने को मजबूर हुआ है। परिजनों ने बताया कि किसान के पास आठ बीघा जमीन थी। चकबंदी में उसके आठ बीघा जमीन के चक को दो स्थानों पर काट दिया। एक जगह तीन बीघा और दूसरी जगह पांच बीघा जमीन दी ।
चकबंदी अधिकारियों से इसका विरोध भी किया और अपने आठ बीघा जमीन के चक को एक ही जगह काटने के लिए कहा था, लेकिन किसान की पीड़ा की अनदेखी की गई। परिजनों ने कहा इससे क्षुब्ध होकर उसने दो साल से अपनी जमीन में फसल भी नहीं बोई और जमीन खाली पड़ी हुई है।
दूध बेचकर जीवन यापन कर रहा था। उधर, जैसे ही पोस्टमार्टम के बाद शव गांव में पहुंचा ग्रामीणों ने अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया। ग्रामीणों ने कहा प्रशासन की अनदेखी बड़ी वजह है। एसओ चितवन कुमार मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों का मान-मनौव्वल कर किसी तरह मनाया। ग्रामीणों को मुकदमा दर्ज करने का आश्वासन दिया । डीएम भवानी सिंह खंगारौत ने कहा प्रकरण की जांच कराई जाएगी। यदि किसी स्तर पर लापरवाही मिलती है तो सख्त कार्रवाई भी होगी।