कार्तिक पूर्णिमा पर हजारों श्रद्धालुओं ने यमुना में स्नान कर पुण्य लाभ कमाया। शहर के पक्काघाट पर यमुना में श्रद्धालुओं ने दीपदान किया और पूजा-अर्चना की। इस दौरान निवाड़ा पुल से लेकर पक्काघाट तक भारी भीड़ रही।
यमुना के दोनों तटों पर मेला लगा रहा। करीब 25 हजार श्रद्धालुओं ने यमुना में स्नान किया। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति की पल-पल जानकारी लेते रहे।
बुधवार को यमुना के पक्काघाट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ लगनी शुरू हो गई। दूरदराज के गांवों बिचपड़ी, अमीनगर सराय, डौला, खट्टा प्रह्लादपुर, खेकड़ा, सिंघावली अहीर, बालैनी, बुढ़सैनी, मीतली, गौरीपुर, अग्रवाल मंडी टटीरी समेत जिले के कई गांवों से ट्रैक्टर ट्रालियों में लोग यमुना में स्नान करने के लिए पहुंचे।
यमुना के दूसरे किनारे पर हरियाणा के गांवों से हजारों श्रद्धालु यमुना में स्नान करने के लिए पहुंचे। भीड़ इतनी अधिक हो गई कि पुलिस को व्यवस्था के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। तड़के ही श्रद्धालुओं ने स्नान करना शुरू कर दिया। उगते सूर्य को भक्तों ने जल अर्पित किया। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया भीड़ बढ़ती चली गई।
मध्याह्न तीन बजे तक यमुना घाट पर भारी भीड़ रही। श्रद्धालुओं ने यमुना के घाट पर पहले पूजा अर्चना की और फिर यमुना जल में दीप दान किया। कई लोगों ने मुंडन एवं अन्य संस्कार भी संपन्न कराए।
खरीदारी की
कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर पक्काघाट पर मेले का आयोजन किया गया। मेले में दूरदराज से पहुंचे दुकानदारों ने अपनी दुकानें लगाईं। लोगों ने जमकर खरीदारी की। बच्चों के लिए झूले लगाए गए और खिलौनों की दुकानों से भी जमकर खरीदारी की गई। खाद्य सामग्री की भी दुकानें लगाई गईं।
घाट से पानी दूर होने से परेशान रहे श्रद्ध्ालु
पक्काघाट से कुछ दूरी पर यमुना की धारा पहुंच जाने से श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। रेत अधिक होने के कारण श्रद्धालुओं को हवा के साथ उड़ रहे बालू रेत ने काफी परेशान किया।
धूल के उड़ते गुबार के चलते लोग धूल धूसरित हुए। लोगों का कहना था कि यमुना के पक्काघाट के पास से यमुना की धारा निकलनी चाहिए, जिससे लोगों को रेत में न जाना पड़े। कुछ लोगों द्वारा खनन किए जाने के कारण यमुना की धार घाट से लगभग 300 मीटर दूर हो गई है।