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डूबती हैंडलूम इकाइयों के बदलेंगे दिन

Tue, 02 Jan 2018 01:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
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निरपुड़ा गांव स्थित हैंडलूम में रखा सामान - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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यूपी में लागू होने जा रही एक जिला एक उत्पाद योजना से बागपत की हैंडलूम इकाइयों के दिन बदल सकते हैं। सहायता और प्रोत्साहन के अभाव में निरपुड़ा गांव में सैकड़ों हैंडलूम इकाई बंद हो चुकी हैं। इस कारण सैकड़ों लोगों के सामने रोजगार का संकट गहराया है। 
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वर्तमान में जो इकाइयां चल रही हैं, उनके भी अच्छे दिन नहीं कहे जा सकते। संचालक कहते हैं कि जीएसटी ने उनके लिए नई समस्या खड़ी कर दी है। सरकार के अगले कदम पर हैंडलूम इकाइयों का भविष्य और जिले के हजारों लोगों का रोजगार टिका है।

उत्तर प्रदेश के स्थापना दिवस पर 24 जनवरी को इस नई स्कीम की सौगात मिल सकती है। जिले के हैंडलूम उत्पाद को इसमें शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है। लखनऊ में योजना का खाका खींचा जा रहा है।
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हैंडलूम की बात करें तो जिले में खेकड़ा, सिंघावली अहीर और निरपुड़ा में बुनकर अलग-अलग कामों से जुड़े हैं। जिले में बड़ी इकाइयों की संख्या सिर्फ 12 है, लेकिन छोटी इकाइयां सैकड़ों में है। निरपुड़ा की सैकड़ों हैंडलूम इकाई घाटे के चलते बंद हो चुकी हैं। बेरोजगारी का आलम है।

बुनकर इमरान अहमद, आजाद, नईम, शाकिर, अहसान, नसीम निन्हा, कय्यूम बताते हैं कि सरकार की तरफ से कोई प्रोत्साहन और सहायता नहीं मिल पाने के कारण निरपुड़ा की हैंडलूम इकाइयां बंद हो चुकी हैं।

जिस कारण यहां काम करने वाले अब बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। जो हैंडलूम इकाइयां चल रही हैं, उन पर भी संकट के बादल हैं। निरपुड़ा की प्रधान के पुत्र निश्चय राणा कहते हैं कि सरकार की नई स्कीम से गांव में विकास होगा और रोजगार बढ़ेगा। इस काम से गांव की पहचान भी जुड़ी है।

जीएसटी के बाद बढ़ीं मुश्किलें
बुनकर मुस्तफा हाजी, साजिद, हाशिम, सोमदत्त शर्मा, राजीव शर्मा, कपिल शर्मा, वीरपाल प्रजापति बताते हैं कि पिछले दस साल से हैंडलूम  इकाइयों पर संकट हैं, लेकिन जीएसटी के बाद अब मुसीबत बढ़ गई है। यहां बनने वाले उत्पाद को जब पानीपत या अन्य शहरों में ले जाया जाता है तो जीएसटी नंबर की डिमांड की जाती है। जबकि कारोबार घटा है। कानून की पूरी तरह यहां जानकारी नहीं है।

निरपुड़ा में पायदान, खेकड़ा में बेड सीट
निरपुड़ा में पायदान, दरी, कंबल और खेकड़ा में अधिकतर बेड सीट बनाई जाती हैं। इसके बाद इनकी सप्लाई दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड तक की जाती है। निरपुड़ा में बनने वाले उत्पाद की सप्लाई अधिकतर पानीपत में होती है।

बेरोजगार हैं पांच हजार बुनकर
हथकरघा एवं वस्तु उद्योग विभाग में ही करीब पांच हजार बुनकर चिन्हित है, लेकिन हैंडलूम  इकाइयों के बंद होने से धीरे-धीरे यह बेरोजगार होकर दूसरे काम में लग गए हैं। विभाग के सुपरवाइजर बनारसी दास बताते हैं कि प्रोत्साहन से बनुकरों को बड़ा लाभ होने की उम्मीद है।
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