दोघट क्षेत्र के बामनौली गांव स्थित बाबा नागदेव का मंदिर
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-350 वर्ष पहले गांव के पूर्वज हरियाणा के रोहतक जिले के थाना गांव से नागेश्वर को लेकर आए थे यहां
दोघट (बागपत)। बामनौली गांव का नाग देवता मंदिर आस्था का केंद्र बना हुआ है। दूर-दराज से श्रद्धालु मंदिर में पहुंचकर पूजा अर्चना करते हैं। नाग पंचमी पर मेले का आयोजन होता है, लेकिन इस बार कोरोना के कारण मेला नहीं लगेगा।
गांव के पूर्व प्रधान महिपाल सिंह बताते हैं कि बामनौली में 350 वर्ष पूर्व गांव के पूर्वज हरियाणा के रोहतक जिले के थाना गांव से नागेश्वर को लेकर आए थे और नाग बाबा मंदिर की स्थापना की। उसी समय से नाग पंचमी के दिन यहां पर विशेष पूजा-अर्चना होती हैं। नाग पंचमी पर बड़ा मेला आयोजित होता है। दीपावली और होली पर भी ग्रामीण पूजा पाठ करते हैं। मंदिर में कोई पुजारी नहीं है। ग्रामीण खुद ही दूध नाग मंदिर में चढ़ा कर विशेष पूजा अर्चना कर मन्नते मांगते हैं।
तालाब से मिट्टी निकालने की परंपरा
दोघट। ग्रामीण बताते हैं कि मंदिर के पास पहले एक बड़ा तालाब था। उस तालाब से थोड़ी सी मिट्टी निकाल कर पूजा की जाती थी, लेकिन अब तालाब नहीं है। मंदिर परिसर में एक छोटी सी जगह में जल भरकर अब भी मिट्टी निकालने की औपचारिकता की जाती है।
बेटा होने पर की जाती है पूजा अर्चना
दोघट। बामनौली गांव की कोई भी लड़की कहीं भी हो, उसे लड़का पैदा होता है तो वह गांव में पहुंचकर नाग मंदिर पर पहुंच कर प्रसाद चढ़ाती है। विशेष भोज का आयोजन करती है।