फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शहीद की पत्नी को राज्य सरकार से नहीं मिल रही पेंशन

विज्ञापन
बड़ौत के बावली गांव के शहीद अनिल के माता-पिता - फोटो : BARAUT
विज्ञापन
शहीद की पत्नी को राज्य सरकार से नहीं मिल रही पेंशन
विज्ञापन

कारगिल युद्ध में शहीद हुए थे बावली गांव के बेटे अनिल कुमार तोमर, पिता भी रहे फौजी
अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। कारगिल की चोटियों पर सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीदों के परिवारों की आंखें अपनों को याद कर छलक उठती हैं। तिरंगे की आन बान और शान के लिए अपने खून से इन्होंने अमर कहानी लिखी। शहादत के बाद तमाम घोषणाएं की गईं। साथ निभाने का वादा हुआ, लेकिन 21 बरस बीतते-बीतते नियमों की उलझन में परिवारों की दी जाने वाली सुविधा भी उलझ सी गई हैं। बावली गांव के कारगिल शहीद अनिल कुमार तोमर की पत्नी सविता देवी को राज्य सरकार की ओर से दी जानी वाली पेंशन का लाभ तक नहीं मिल रहा है।
बलिदान की अमर कहानी
बुजुर्ग पिता सुल्तान सिंह खुद फौजी रहे। देश सेवा का जज्बा आज भी उनके सीने में है। फौजी परिवार की इसी परंपरा को निभाते हुए अनिल तोमर भी साल 1995 में सेना में भर्ती हुए थे। कारगिल युद्ध के दौरान अनिल तोमर 17वीं जाट बटालियन का हिस्सा थे। अनिल तोमर की तैनाती द्रास सेक्टर के पिंपल यू प्वाइंट में थी। मोर्चे से तोमर ने एक इंच भी पीछे हटे बगैर दुश्मन सैनिकों पर हमला किया और युद्ध के दौरान सात जुलाई 1999 को देश के लिए शहादत दी।
विज्ञापन

क्या मिला शहीद के परिवार को
गांव में शहीद के नाम पर गेट बनवाया गया। उनकी मूर्ति की स्थापना हुई। बड़ौत में बावली रोड पर गैस एजेंसी का आवंटन किया गया। केंद्र सरकार की ओर से दी जानी वाली पेंशन का लाभ मिल रहा है, लेकिन राज्य सरकार की ओर से शहीद की पत्नी को दी जानी वाली पेंशन नहीं मिल रही है। शहीद की पत्नी सविता देवी ने पेंशन दिलाने की मांग प्रशासन से की है।
शहीद की पत्नी पर सबको फख्र
शादी के कुछ दिन बाद ही अनिल तोमर शहीद हो गए थे। इसके बावजूद शहीद की पत्नी सविता देवी ने हिम्मत नहीं छोड़ी। पूरे परिवार को हिम्मत बंधाई। यही नहीं ससुराल में ही रहने का फैसला किया। दोनों परिवारों ने उसके फैसले पर हामी भरी। बाद में दोनों परिवारों की सहमति से देवर के साथ सविता की शादी कर दी गई।
प्रत्येक युवा की होनी चाहिए ट्रेनिंग
पूर्व सैनिक समिति बागपत के जिलाध्यक्ष रिसालदार मेजर शीशपाल सिंह का कहना है कि अनिल तोमर जैसे शहीदों की बदौलत ही तिरंगा शान से फहरा रहा है। युवाओं को देश सेवा का संकल्प लेना चाहिए। प्रत्येक युवा को सेना की ट्रेनिंग जरूर दी जानी चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर वह देश के काम आ सके।
विज्ञापन

भारतीय सेना सबसे जोशीली : बीएस पंवार
मूल रूप से ककड़ीपुर गांव निवासी मेजर जनरल रिटायर्ड बीएस पंवार का कहना है कि देश की सेना सबसे ज्यादा जोशीली है। कारगिल में शौर्य की पराकाष्ठा दिखाई। ऊंची चोटियों पर लड़ी गई यह विरलतम लड़ाई थी। कारगिल युद्ध के समय वह ब्रिगेडियर थे और सेना में मेजर जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए। देश के लिए सराहनीय सेवाओं के लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें