कुर्डी टीले पर ट्रेंच में की गई खोदाई। स्रोत ग्रामीण
- फोटो : जलसे में विचार रखते मुफ्ती।
बड़ौत। कुर्डी टीले पर उत्खनन में सामने आ रहे पुरावशेषों से मानव बस्ती की दावेदारी मजबूत हो गई है। मगर, अभी शोध के बाद पुरातत्वविदों की मुहर लगनी बाकी है। वहां शनिवार को भी उत्खनन किया गया।
उत्खनन में निकल रहे पुरावशेषों से कुर्डी का टीला इतिहास की दृष्टि से पुरातत्वविदों के लिए खास होता जा रहा है। टीले से अभी तक दफन राज को बाहर निकालने के लिए भारतीय विरासत संस्थान की टीम ने खोदाई शुरू कर रखी है। टीले पर बनाए गए 12 ट्रेंचों में खोदाई की जा रही है। खोदाई के दौरान अभी तक टीले से ईंटें, दीवारें, मृदभांड व अन्य तरह से पुरावशेष निकले है।
इस तरह से पुरावशेष सिनौली में की गई खोदाई के दौरान निकले थे। शोध के बाद सिनौली में पुरातत्वविदों ने मानव बस्ती होने पर अपनी मुहर लगा दी थी। इस तरह कुर्डी टीले पर जो पुरावशेष निकले हैं, उनसे मानव बस्ती होने की पुष्टि होती है। मगर, अभी पुरातत्वविदोंं की पुष्टि होना बाकी है।
हालांकि, इन पुरावशेषों को देखकर कहीं न कहीं पुरातत्वविदों में हलचल होनी शुरू हो गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि अन्य ट्रेंच भी कुछ राज उगल सकते है। उधर, तिलवाड़ा टीले पर चल रहे उत्खनन में सुराही, मृदभांड व चबूतरानुमा आकृति के अलावा और कुछ अभी तक सामने नहीं आ रहा है।