संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। वट और सोमवती अमावस्या पर यमुना पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। श्रद्धालुओं ने यमुना में डुबकी लगाई और घाट पर पूजा और हवन कर मन्नत मांगी। शाम को शनि जयंती पर लोगों ने पीपल के वृक्ष पर सरसों के तेल का दीपक जलाकर शनि देव की पूजा अर्चना की।
सोमवार को सोमवती अमावस्या, वट अमावस्या और शनि जयंती का महा संयोग बना। मान्यता है कि वट अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान करने के उपरांत पूजा अर्चना के बाद दान करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। सोमवार को श्रद्धालुओं ने यमुना नदी में स्नान कर पूजा अर्चना कर मन्नत मांगी। घरों और मंदिरों में महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा की। शाम को शनि जयंती के अवसर पर श्रद्धालुओं ने पीपल के पेड़ पर सरसों के तेल का दिया जलाकर शनि देव की पूजा अर्चना की। ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि वट व सोमवती अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान करने के बाद दान करने से मनुष्य को उत्तम फल की प्राप्ति होती है। वट वृक्ष की पूजा करने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। शनि जयंती पर पीपल के पेड़ पर आटे से बनाए दीपक में सरसों का तेल जलाने से मनुष्य की दरिद्रता दूर होती है।