बड़ौत के फतेहपुर पुट्ठी नम्बर एक में गेट पर शिक्षकों के इंतजार में खड़े बच्चें
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बागपत। चार महीने बाद दोबारा से प्राथमिक विद्यालय खुले तो शिक्षक-शिक्षिकाओं की आरामतलबी की आदत नहीं छूट रही है। प्राथमिक विद्यालयों में हालात ये हैं कि शिक्षक-शिक्षिकाएं समय पर नहीं पहुंचते हैं। अधिकतर स्कूलों में ताला लटका होने से बच्चे गेट पर खड़े रहते हैं। जहां ताला नहीं रहता है वहां बच्चे खुद दरवाजा खोलकर अंदर जाते हैं। अधिकारी भी ऐसे शिक्षक-शिक्षिकाओं पर शिकंजा कसने के लिए कार्यालय से बाहर नहीं निकलते हैं।
प्राथमिक विद्यालयों की स्थिति देखने के लिए अमर उजाला की टीम ने बृहस्पतिवार को करीब 25 जगह का जायजा लिया। जिनमें अधिकतर जगह हालात बुरे दिखाई दिए और शिक्षक-शिक्षिकाओं के समय पर नहीं आने से बच्चे बाहर खड़े रहे। प्राथमिक विद्यालयों में 8.15 बजे से 9 बजे तक शिक्षक-शिक्षिकाएं पहुंचे। कुछ शिक्षक नौ बजे के बाद पहुंचे। ऐसे में सरकारी स्कूलों में पढ़ने के लिए बच्चों को रुझान कैसे बढ़ेगा।
प्रधानाध्यापक के बाद पहुंचे शिक्षक
प्राथमिक विद्यालयों में अधिकतर शिक्षक-शिक्षिकाएं दिल्ली से आते हैं। वे कभी समय पर नहीं आते हैं। फैजपुर निनाना, बड़ौत, फतेहपुर पुट्ठी, छपरौली, लूंब के स्कूलों में सबसे ज्यादा स्थिति खराब है। वहीं, बागपत के प्राथमिक विद्यालय नंबर दो में प्रधानाध्यापक सुबह साढ़े सात बजे ही पहुंच गए थे, लेकिन शिक्षक-शिक्षिकाएं साढ़े आठ बजे तक पहुंचे। बागपत व टटीरी में रहने वाली शिक्षिकाएं सबसे देरी से पहुंचीं।
शिक्षक-शिक्षिकाएं स्कूलों में समय से नहीं पहुंच रहे हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अब स्कूल खुले हैं और मैं बृहस्पतिवार को सेमिनार में होने के कारण स्कूलों में नहीं जा सका। स्कूलों का शुक्रवार से निरीक्षण शुरू कर दिया जाएगा। किसी स्कूल में शिक्षक-शिक्षिका देरी से आते हैं तो उनके खिलाफ तभी कार्रवाई की जाएगी।-राघवेंद्र सिंह, बीएसए बागपत