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Baghpat News: नौकरी छोड़ शिक्षा देने की राह पर चले तो कोई 30 साल से निशुल्क पढ़ा रहा

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बड़ौत। शिक्षक दिवस पर क्षेत्र के ऐसे शिक्षकों को याद करना जरूरी है, जिन्होंने बच्चों के भविष्य के लिए अपनी राह बदली। किसी ने रेलवे की आरामदायक नौकरी छोड़ी तो किसी ने यूपी पुलिस की नौकरी छोड़कर शिक्षण करने को अपनाया। कोई 30 साल से जरूरतमंद बच्चों को निशुल्क पढ़ा रहा है तो कोई विद्यालय की ड्यूटी के बाद बेटियों को शिक्षित करने में जुटा है। अपने समय और अनुभव का उपयोग करके यह बच्चों को पढ़ाई के साथ संस्कार और आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रहे हैं। इनके शिष्य आज पुलिस, सेना और अन्य क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहे हैं।
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30 साल से जरूरतमंद बच्चों को निशुल्क पढ़ा रहे अशोक
दोघट निवासी अशोक पिछले 30 साल से जरूरतमंद बच्चों को निशुल्क पढ़ा रहे हैं। उनकी कक्षा से पढ़कर निकले 150 से अधिक विद्यार्थी अलग-अलग क्षेत्रों में मुकाम हासिल कर चुके हैं। उनके शिष्यों में संदीप यूपी पुलिस, सागर सेना और अंकित दिल्ली पुलिस में सेवा दे रहे हैं। आर्थिक परेशानी से जूझ रहे बच्चों के लिए अशोक आज भी बड़ा सहारा बने हुए हैं।

बच्चों को कूड़ा बीनते देखा तो नरेंद्र ने छोड़ दी रेलवे की नौकरी
दोघट की पट्टी तिरोशिया के नरेंद्र ने वर्ष 2008 में रेलवे में नौकरी शुरू की और वह चित्तौड़गढ़ में तैनात थे। नौकरी के दौरान उन्होंने कई बच्चों को कूड़ा बीनते देखा। बच्चों की स्थिति ने उन्हें ऐसा कर दिया कि उन्होंने रेलवे की नौकरी छोड़कर शिक्षण का मार्ग चुना। पहले बच्चों को खुद पढ़ाना शुरू किया गया और वर्ष 2015 में शिक्षक के पद पर चयनित होने के बाद भी वह विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ संस्कार और अनुशासन की सीख दे रहे हैं।
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यूपी पुलिस की नौकरी छोड़ी, शिक्षक बन गए संदीप तोमर
प्राथमिक विद्यालय लक्ष्मीबाई बड़ौत में तैनात बामनौली गांव निवासी शिक्षक संदीप तोमर ने वर्ष 2004 में यूपी पुलिस की नौकरी छोड़कर शिक्षण की राह को चुना। बच्चों को पढ़ाने और उनके भविष्य को बेहतर बनाने की इच्छा ने उन्हें इस राह पर आगे बढ़ाया। शिक्षक बनने के बाद वह पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास पर भी ध्यान दे रहे हैं।

ड्यूटी के बाद बेटियों को निशुल्क पढ़ाते हैं अनुज पंवार
प्राथमिक विद्यालय नंबर दो धनौरा सिल्वरनगर में तैनात बड़ौत के बिनौली रोड निवासी शिक्षक अनुज पंवार ड्यूटी पूरी करने के बाद आजाद नगर कॉलोनी में हरिदास के मकान पर बेटियों को निशुल्क पढ़ाते हैं। आजाद नगर, चरण सिंह विहार, न्यू रामनगर कॉलोनी समेत आसपास की कई कॉलोनियों की बेटियां उनसे शिक्षा लेती हैं। उनकी पढ़ाई का असर यह है कि चरण सिंह विहार कॉलोनी की स्वाति डाकघर और वाजिदपुर गांव निवासी पारुल यूपी पुलिस में नौकरी कर रही हैं। इसके अलावा कई अन्य बेटियां भी सरकारी और निजी क्षेत्रों में कार्यरत हैं।
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