एमबीए की परीक्षा में हुआ फर्जीवाड़ा
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बागपत में फर्जी दस्तावेजों की मदद से धोखाधड़ी से बैंक से लोन लेने के आरोपी नरेश ने पुलिस को चकमा देकर कोर्ट में सरेंडर कर दिया। इस मामले में बैंक के रिटायर मैनेजर समेत चार आरोपी पहले ही जेल जा चुके हैं।
इलाहाबाद बैंक की बागपत में स्थित शाखा से वर्ष 2009 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ट्रैक्टरों पर लोन दिया गया था। कोतवाली में मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। विवेचना के आधार पर पुलिस ने तत्कालीन बैंक मैनेजर समेत कई लोगों को मुल्जिम माना। पुलिस ने रिटायर मैनेजर (तत्कालीन प्रबंधक) अनिल गोपाल गर्ग को करीब डेढ़ माह पूर्व गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
इस मामले में आरोपी महक सिंह, श्रवण, राजफूल भी जेल जा चुके है। अन्य आरोपी फरार चल रहे थे। सोमवार को आरोपी नरेश निवासी बसी ने न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। विवेचक इंस्पेक्टर राजेंद्र सिंह का कहना है कि पुलिस दबाव के चलते ही आरोपी नरेश ने कोर्ट में सरेंडर किया है।
ये आरोपी चल रहे फरार
बागपत। बैंक के फिल्ड ऑफिसर जगत सिंह के अलावा छपरौली निवासी रविंद्र, पप्पू, जितेंद्र, रठौड़ा गांव के (हाल निवासी बड़ौली रोड बड़ौत) कृष्णपाल, रमेश व दो अज्ञात फरार चल रहे है।