बागपत जिला चिकित्सालय में स्वास्थ्य सेवाएं बैपटरी है। ओपीडी में डॉक्टरों के नहीं मिलने के कारण मरीजों को घर लौटना पड़ता है। अधिकतर बीमारियों में पैरासिटामॉल लिखने का आरोप मरीज लगा रहे हैं। मरीज हायर सेंटर रेफर कर दिए जाते हैं। अस्पताल में चिकित्सकों समय पर आना तो दूर, वे ओपीडी में भी बैठना पसंद नहीं करते। यहां मरीजों की लंबी लाइन लगी रहती है। सफाई व्यवस्था भी यहां खराब है।
मरीज बोले, हम तो परेशान हो गए
करनावल के नसीम ने बताया कि उसकी पत्नी फरजाना गर्भवती है। प्रसव पीड़ा होने पर जिला अस्पताल में महिला चिकित्सक से मिले। आरोप है कि चिकित्सक ने जांच के लिए दोबारा चार जुलाई को आने के लिए कह दिया। नौरोजपुर निवासी गोपी ने बताया कि पत्नी पूनम बीमार है। चिकित्सकों ने ईसीजी जांच के लिखा। कई घंटे तक ईसीजी जांच रूम के बाहर खड़े रहे, लेकिन कोई कर्मचारी नहीं पहुंचा। ललिता निवासी कोताना ने बताया कि सुबह से डॉक्टर का इंतजार कर रही है, लेकिन कान देखने के लिए डॉक्टर नहीं आया।
थक हारकर वह अपने घर चली गई। राशिद निवासी निवाड़ा ने बताया उसके पुत्र रिहान के कान दर्द था। वह बाल रोग विशेषज्ञ के पास गया तो बिना देखे ही पैरासिटामॉल और दर्द की दवाई दे दी। नीरज निवासी पिलाना ने बताया वह अपने बहन कविता के उपचार कराने के लिए जिला अस्पताल आया। जिस भी चिकित्सक से मिलते वह अलग-अलग ओपीडी में भेज दिया जाता। परेशान होकर सीएमएस से मिला। उन्होंने बहन का उपचार किया।
परिसर में फैली गंदगी
जिला अस्पताल में चारों ओर गंदगी का साम्राज्य है। चिकित्सकों की ओपीडी के बराबर में गंदगी का आलम है।
ईसीजी का नहीं टेक्नीशियन
जिला अस्पताल में ईसीजी जांच करने के लिए कोई भी टेक्नीशियन नहीं है। फार्मेसिस्ट ही लोगों की ईसीजी जांच करते है। फार्मेसिस्ट द्वारा दवाइयां देने में व्यस्त रहने पर लोग जांच करवाने के लिए परेशान रहते हैं।
साल्ट से दी जा रही मरीजों को दवा
जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. अशोक लाटियान, दंत रोग चिकित्सक और सीएमएस डॉ. बीएलएस कुशवाहा ने बताया मरीजों की जांच के बाद पर्चियों पर दवाईयों का साल्ट लिखा जाता है। कुछ दवाईयों के नाम ब्रांड से भी लिखा जाता है। अधिकांश दवाएं साल्ट से ही मरीजों को लिखकर दी जा रही है।
आधा से एक घंटा देरी से पहुंचते है चिकित्सक
चिकित्सक अपनी ओपीडी में अपने समय से आधा से एक घंटा देरी से पहुंचे। सीएमएस डॉ. बीएलएस कुशवाहा का दावा है कि अस्पताल में नियमित साफ-सफाई कराई जाती है। कान वाले चिकित्सक अवकाश पर थे। गर्भवती महिला के दर्द से तड़पने का मामला संज्ञान में नहीं है। महिला की ईसीजी जांच फार्मेसिस्ट से करा दी गई थी। टेक्नीशियन नहीं है।