फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गुड़ की चासनी में चीनी की मिठास

विज्ञापन
मांगरौली गांव सति तैयार होता गुड़ - फोटो : BAGHPAT
विज्ञापन
गुड़ की चासनी में चीनी की मिठास
विज्ञापन

बागपत। कोल्हुओं में बनाए जा रहे नए गुड़ में मिठास बढ़ाने के लिए चीनी का सहारा लेना पड़ रहा है। महंगी चीनी खरीदकर गुड़ की चासनी में मिलाना कोल्हू संचालकों के लिए आर्थिक रूप से भारी पड़ रहा है। इससे गुड़ की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। मंडी मेें गुड़ का भाव कम है। इस कारण आढ़ती और कोल्हू संचालक दोनों को ही नुकसान उठाना पड़ रहा है। मौसम का मिजाज अभी गरम है, जिस कारण गन्ने से रिकवरी कम है और मिठास भी अधिक नहीं है। जिले में संचालित 70 से अधिक कोल्हुओं में बन रहे गुड़ को मीठा करने के लिए चासनी में चीनी की मिठास घोली जा रही है। इससे गुड़ की क्वालिटी खराब होती है। गुणवत्ता खराब होने से कई राज्यों में गुड़ की मांग प्रभावित हुई है। इससे कोल्हू संचालक और आढ़तियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों को भी कम भाव मिल रहा है, जिस कारण किसान भी घाटे में हैं।
किसने क्या कहा....
- बड़ौत गुड़ मंडी में आढ़ती प्रमोद पालीवाल का कहना है कि गुड़ का भाव करीब 3000 रुपये प्रति क्विंटल है। इस भाव में आढ़ती को नुकसान है।
- कोल्हू संचालक सरफराज का कहना है कि चासनी में चीनी मिलाकर गुड़ बनाना पड़ रहा है। गन्ने की मिठास से अभी चाक से गुड़ नहीं उठ रहा है। यह कोल्हू संचालकों के लिए और अधिक महंगा है।
विज्ञापन

- किसान सरदार सिंह का कहना है कि कोल्हू में 230 से 240 रुपये क्विंटल गन्ने का भाव चल रहा है। यह भाव कम है। किसानों को लागत के हिसाब से भाव मिलना चाहिए।
विज्ञापन

गुजरात, मध्य प्रदेश में घट रही मांग
बागपत। गुणवत्ता खराब होने के साथ-साथ गुड़ की कई राज्य में मांग फिलहाल कम है। इसके अलावा अब गुजरात और मध्य प्रदेश में गन्ने का रकबा बढ़ा है और वहां पर कोल्हू लगने लगे हैं। इस कारण यूपी की मंडियों से गुड़ की मांग कम हो गई है।

मांगरौली स्थित कोल्हू में गन्ना डालते हुए- फोटो : BAGHPAT

दोघट क्षेत्र के कोल्हू में पेटियों में पैक किया गया गुड़- फोटो : BAGHPAT

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें