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Baghpat News: वन गये श्रीराम, पुत्र वियोग में दशरथ ने त्यागे प्राण

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बिनौली। अनमोल रामलीला पार्टी के सौजन्य से तितरौदा गांव की धर्मशाला के पास चल रहे रामलीला मंचन में मंगलवार रात दशरथ मरण व राम वनवास का कलाकारों ने मनमोहक मंचन किया।
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मंचन में राम-सीता और लक्ष्मण का वन को प्रस्थान करने पर राम के वियोग में राजा दशरथ प्राण त्याग देते हैं। श्रीराम को वनवास जाते देखकर भक्तों की आंखों में पानी आ जाता है। वन प्रस्थान के दौरान जब राम-सीता और लक्ष्मण की मुलाकात निषादराज से होती है। वे तीनों को वन जाने से रोकने का प्रयास करते हैं। इस पर श्रीराम कहते हैं कि रघुकुल में कोई अपना वचन नहीं तोड़ता। यह कहकर आगे बढ़ते हुए सरयू तक पहुंच जाते हैं और केवट से नदी पार कराने को कहते हैं। केवट नदी पार कराने को राजी तो हुआ लेकिन पहले उनके पांव धोने की बात कही। इसके बाद केवट ने तीनों के पांव धोए और श्रीराम का आशीर्वाद भी लिया। इसके बाद उन्होंने नाव में बैठकर सरयू नदी पार की। इस अवसर पर डायरेक्टर डॉ. विनय कुमार पांडेय व अन्य शामिल रहे। श्री प्रेम मंडल रामलीला कमेटी के सौजन्य से बिनौली के शिव मंदिर में चल रही रामलीला में डायरेक्टर प्रवीण गुप्ता के निर्देशन में परशुराम लक्ष्मण संवाद, कैकेयी द्वारा राजा दशरथ से वरदान मांगने का मंचन किया गया। सीता स्वयंवर में शिव धनुष टूटने के साथ ही भगवान परशुराम जनक के दरबार में पहुंच जाते हैं। भगवान परशुराम राजा जनक से पूछते हैं कि उनके आराध्य देव का धनुष किसने तोड़ा है। इस दौरान लक्ष्मण-परशुराम संवाद को विशेष रूप से पसंद किया गया।
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