बड़ौत। एशियन गेम्स में बागपत के दो किसानों की बेटियां तान्या चौधरी और अनुष्का यादव हैमर थ्रो में पदक की दौड़ में रहीं, लेकिन फाइनल में पदक से चूक गईं। गाधी गांव की तान्या चौधरी 65.35 मीटर हैमर फेंककर चौथे और बालैनी की अनुष्का यादव ने 64.56 मीटर दूर हैमर फेंककर पांचवें स्थान पर रहीं। इन दोनों को पदक भले ही नहीं मिल सका, लेकिन दोनों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर दम दिखाकर अपने प्रदर्शन से लोगों का दिल जीत लिया। अब दोनों से आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक की उम्मीद है।
नेशनल रिकॉर्ड के साथ एशियन गेम्स तक पहुंचीं तान्या
गाधी की तान्या चौधरी ने एशियन गेम्स से पहले शानदार प्रदर्शन किया। 10 सितंबर को नई दिल्ली में हुई इंडियन एथलेटिक्स सीरीज फाइनल में तान्या ने 68.35 मीटर दूर हैमर फेंककर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। इससे पहले जून में बालैनी की अनुष्का यादव ने 67.02 मीटर का थ्रो कर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था। तान्या कम उम्र में ही हैमर थ्रो में अपनी पहचान बना चुकी हैं। वह जूनियर एशियन चैंपियन रह चुकी हैं और खेलो इंडिया में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। उनके नाम आठ स्वर्ण समेत 15 से अधिक पदक हैं। तान्या से हर किसी को एशियन गेम्स में पदक की उम्मीद थी, मगर फाइनल में चौथा स्थान हासिल किया।
रिकॉर्ड तोड़कर अनुष्का ने पक्की की थी एशियन गेम्स की जगह
बालैनी की अनुष्का यादव ने भी एशियन गेम्स से पहले दमदार प्रदर्शन किया। जून में हुई इंटर स्टेट एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने पहले 65.64 मीटर का थ्रो किया और अंतिम प्रयास में 67.02 मीटर दूर हैमर फेंककर नया सीनियर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। इसी प्रदर्शन के दम पर उन्होंने एशियन गेम्स में जगह बनाई। 10 सितंबर को नई दिल्ली में हुई इंडियन एथलेटिक्स सीरीज फाइनल में अनुष्का ने 66.34 मीटर का थ्रो कर दूसरा स्थान हासिल किया था। इसके बाद एशियन गेम्स के फाइनल में 64.56 मीटर का थ्रो कर पांचवां स्थान हासिल किया।
खेल देखते रहे परिवार, कहा पदक नहीं जीतने पर थोड़ी मायूसी हुई
तान्या व अनुष्का के परिवार वाले मंगलवार को दोनों का खेल देखते रहे। अनुष्का के पिता सुशील यादव ने बताया कि जब बेटियां फाइनल में पहुंचीं तो खुशी की ठिकाना नहीं था कि एक साथ बागपत की दो बेटियां फाइनल में पहुंच गईं। जब फाइनल में देखा कि ब्रांज मेडल 68.42 मीटर हैमर फेंकने वाली खिलाड़ी को मिला है और तान्या 3.7 मीटर तो अनुष्का 3.86 मीटर पीछे रह गईं। तान्या के पिता नरेंद्र का कहना है कि बेटियों के फाइनल में पहुंचने के बाद पदक नहीं जीतने से बहुत मायूसी हुई है। मन को यह तसल्ली है कि बेटियां फाइनल तक पहुंचीं। अब भविष्य में होने वाली प्रतियोगिताओं के लिए तैयारी कराई जाएगी।