पायल ने खेल में आगे बढ़ने हिम्मत छोड़ दी थी। ऐसे में उन्होंने चार साल पहले खेल के मैदान में कदम रखा और ठान लिया कि अब हालात को हराना है। अब पायल 23 साल की हो चुकी हैं। संघर्ष पूर्ण जीवन में पायल अब तक अपनी उम्र के बराबर पदक जीत चुकी हैं। वह दिगंबर जैन डिग्री कॉलेज की बीए फाइनल की छात्रा हैं।
चार साल पहले उन्होंने कॉलेज की तरफ से खेलना शुरू किया। फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 64 किलो में वह मेरठ यूनिवर्सिटी वेटलिफ्टिंग और पावरलिफ्टिंग की 2022 की चैंपियन हैं। 2023 में रस्साकशी में मेरठ इंटर यूनिवर्सिटी खिताब जीता और इंटर यूनिवर्सिटी कलिंगा भुवनेश्वर प्रतियोगिता में छह कांस्य पदक भी अपने नाम किए। मेरठ यूनिवर्सिटी में अब तक करीब 12 स्वर्ण जीत चुकी हैं।
खेलों से अपने साथ भाई की पढ़ाई का निकल रहीं खर्च
पायल अपने खेल से न केवल पढ़ाई का खर्च निकाल रही हैं, बल्कि परिवार की आर्थिक मदद भी कर रही हैं। भाई आकाश भी पढ़ाई कर रहा है। पायल का कहना है मेरे लिए हर मेडल सिर्फ जीत नहीं, बल्कि अपने परिवार के लिए नई उम्मीद है। पायल की यह कहानी साबित करती है कि अगर हौसला बुलंद हो तो हालात चाहे जितने मुश्किल क्यों न हों, जीत पक्की होती है।
इंटरनेशनल खेलने के लिए कर रहीं अभ्यास
वर्तमान में पायल आठ से 10 घंटे कड़ी मेहनत करने के साथ-साथ नौकरी की तलाश कर रही हैं। पायल का इंटरनेशनल खेलने का सपना है और इसकी वह तैयारी कर रही हैं। इसके अलावा परिवार की जिम्मेदारी उठाने के लिए पढ़ाई के साथ ही नौकरी के लिए कोचिंग कर रही हैं।