भूमि शोधन से भूमि जनित रोगों से मिलता है छुटकारा
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। जिला कृषि रक्षा अधिकारी संदीप पाल ने किसानों को बीज शोधन व भूमि शोधन करने के बाद ही खरीफ की फसल जैैसे धान, उर्द, मूंग, मक्का, ज्वार व अरहर की बुवाई करने की सलाह दी है।
विभाग की ओर से 15 जून तक प्रशिक्षण, किसान गोष्ठी के माध्यम से किसानों को बीज शोधन व भूमि शोधन के महत्व के बारे में अभियान चलाकर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। किसान थीरम 75 प्रतिशत की 2.5 ग्राम मात्रा या कार्बन्डाजिम 50 प्रतिशत की 2 ग्राम मात्रा से एक किग्रा बीज या 4 ग्राम ट्राइकोडरमा से एक किग्रा बीज उपचारित कर सकते हैं। धान की फसल में जीवाणु जनित रोगों की रोकथाम के लिए स्टेप्टोमाइसिन सल्फेट 90 प्रतिशत+ टेट्रासाइक्लीन 10 प्रतिशत की 4 ग्राम मात्रा से 25 किग्रा बीज उपचारित करना चाहिए। फसलों में भूमि जनित कीट दीमक, सफेद गिडार, सूत्र कृमि की रोकथाम के लिए क्लोरोपायरीफॉस 20 प्रतिशत की 25लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से या कार्बोफ्यूरान तीन प्रतिशत सीजी की 25-30 किग्रा की मात्रा प्रति हेक्टेअर प्रयोग करनी चाहिए। ब्यूवेरिया बेसियाना बायोपेस्टीसाइड 2.5 से 5 किग्रा प्रति हेक्टेअर 65 से 70 किग्रा गोबर की सड़ी हुई खाद में मिलाकर हल्के पानी का छींटा देकर 8-10 दिन छाया में रखने के पश्चात आखिरी जुताई पर भूमि में मिला देने से दीमक कटवर्म, सफेद गिडार से छुटकारा मिल जाता है।