Meerut News: उपभोक्ताओं का जबरदस्त विरोध सामने आने पर प्रदेश सरकार ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर रोक लगा दी है। खास बात है कि सभी प्रीपेड मीटर अपने आप पोस्टपेड में बदल जाएंगे। इसके लिए उपभोक्ताओं को न कहीं आवेदन की जरूरत है न ही कोई शुल्क देना होगा।
उपभोक्ताओं के आंदोलन के बाद प्रदेश सरकार ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर की व्यवस्था को समाप्त कर दिया है। प्रीपेड के स्थान पर अब स्मार्ट मीटर को पोस्टपेड मोड में बदला जाएगा। इसका उपभोक्ताओं को सबसे बड़ा लाभ होगा कि एडवांस मीटर रिचार्ज करने की बजाय उन्हें एक महीने बाद बिजली बिल का भुगतान करना होगा। प्रीपेड मीटर की तरह अचानक बिजली नहीं काटी जा सकेगी। इसको लेकर उपभोक्ताओं ने राहत की सांस ली है।
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स्मार्ट ग्रिड व्यवस्था का नाम देकर प्रदेश में तेजी से बिजली के स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे थे। इनमें उपभोक्ताओं को बिजली का प्रयोग करने से पहले बैलेंस रिचार्ज करना होता है। बैलेंस माइनस में जाते ही सर्वर आधारित सिस्टम उपभोक्ताओं की अचानक बिजली काट देता था। प्रीपेड सिस्टम का पूरे प्रदेश में विरोध हो रहा था। मेरठ में भी महिलाओं ने स्मार्ट मीटर उखाड़कर मोहनपुरी बिजलीघर में फेंक दिए थे। व्यापारी भी इसका उग्र विरोध कर रहे थे। मामला तूल पकड़ता देखकर प्रदेश सरकार ने प्रीपेड स्मार्ट मीटर सिस्टम वापस लेकर पोस्टपेड करने का आदेश दिया है।
मेरठ में लग चुके हैं एक लाख आठ हजार प्रीपेड मीटर
पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के अंतर्गत आने वाले 14 जिलों में लगभग 80 लाख उपभोक्ताओं में से 13 लाख के यहां स्मार्ट प्रीपेड मीटर लग चुके हैं। मेरठ महानगर में लगभग चार लाख विद्युत उपभोक्ताओं में से एक लाख 18 हजार के यहां स्मार्ट मीटर लगे हैं, जिसमें से एक लाख आठ हजार प्रीपेड मीटर है। सरकार के आदेश के अनुसार, अब ये प्रीपेड मीटर भी पोस्टपोड हो जाएंगे। इससे विद्युत उपभोक्ताओं को बहुत राहत मिलेगी और बार-बार बैलेंस रिचार्ज कराने से मुक्ति मिल जाएगी।
पोस्टपेड व्यवस्था में एक महीने बाद चुकाना होगा बिल
पोस्टपेड व्यवस्था में उपभोक्ता को बिजली इस्तेमाल करने के एक महीने बाद बिल मिलेगा। इस बिल को जमा करने के लिए लगभग 15 दिन का समय मिलेगा जबकि प्रीपेड व्यवस्था में बिजली आपूर्ति सुचारू करने के लिए एडवांस पेमेंट करनी पड़ती है। प्रीपेड मीटर में बैलेंस शून्य होते ही बिजली आपूर्ति ठप हो जाती है। पोस्टपेड में उपभोक्ताओं को अचानक बिजली कटने का संकट नहीं झेलना पड़ेगा।
पेमेंट अपडेट नहीं होने से नहीं जुड़ती बिजली आपूर्ति
विद्युत विभाग के पास बड़ी संख्या में ऐसी शिकायतें पहुंची, जिनमें प्रीपेड मीटर का बैलेंस रिचार्ज करने के बाद भी दो-तीन दिन तक बिजली सप्लाई नहीं जुड़ पाई। पावर कारपोरेशन रिचार्ज करने के अधिकतम दो घंटे बाद तक बिजली सप्लाई चालू करने के दावे करता रहा, लेकिन बिजली नहीं जुड़ने से लोग परेशान रहे। इसके पीछे सर्वर डाउन होने और पेमेंट गेटवे से पैसा विद्युत विभाग के पास नहीं पहुंचने से बिजली नहीं जुड़ पाई।
गलत बिल सुधार का अधिकार
पोस्टपेड विद्युत उपभोक्ता के पास बिल आने पर उसे जांचने और गड़बड़ी होने पर भुगतान से पहले आपत्ति दर्ज कराने का मौका होता है। प्रीपेड कनेक्शन में राशि कटने के बाद हिसाब समझना और रिफंड पाना बेहद जटिल प्रक्रिया है। उपभोक्ता अपने गलत बिल में सुधार के लिए विद्युत अधिकारियों के यहां आवेदन कर सकता है।
किराएदारों और मकान मालिकों के लिए सुविधा
मेरठ शहर में बड़ी संख्या में किराएदार रहते हैं। पोस्टपेड व्यवस्था में महीने के अंत में यूनिट के आधार पर बिल का बंटवारा करना आसान होता है। प्रीपेड में अक्सर इस बात को लेकर विवाद की स्थिति बन जाती है कि पुराना बैलेंस किसका था और नया रिचार्ज किसने कराया। इससे दोनों पक्षों को राहत मिलेगी। मुख्य अभियंता वितरण मेरठ जोन-1 रजनीकांत मिश्र का कहना है कि अभी स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने पर रोक लगी हुई है। सरकार के आदेश के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
जनता का संघर्ष लाया रंग
उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष लोकेश अग्रवाल और पार्षद उत्तम सैनी ने कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर के खिलाफ लोगों का आंदोलन रंग लाया है। इस आंदोलन के बाद ही सरकार ने प्रीपेड व्यवस्था समाप्त की है।