नाव धंस गई थी। महिलाओं ने शोर मचाना शुरू किया। पानी भर चुका था, मदद के लिए लोग चिल्लाने लगे। जो तैर सकते थे बाहर निकल आए। किसी ने बल्ली का सहारा लिया, किसी ने तार पकड़ा, किसी ने बांस और किसी ने रस्सी का सहारा।
मदद कम पड़ गई और चीखते-चीखते यमुना में जिंदगियां दम तोड़ने लगीं। हादसे का दर्द काठा के लोग शायद ही भुला पाएं। नाव से कूदकर बाहर निकले किसान यशवीर बताते हैं कि सवारियां अधिक होने की वजह से नाव डोलने लगी थी।
कुछ ही दूर गई तो पानी भरने लगा। नाव धंस गई, जिन्हें तैरना आता था वह बाहर निकल गए। जिसे सहारा मिल गया, उसकी जिंदगी बच गई। मौत से घिरे लोग चीखने लगे तो आसपास के लोग मदद के लिए भी दौड़े, लेकिन मदद करें तो कैसे। मौत के भंवर में कौन कूदे।
किसी ने तार फेंका, किसी ने बल्ली तो किसी ने रस्सा, लेकिन 19 जिंदगियों को बचाया नहीं जा सका। गांव में एलान हुआ, जिनके अपने घर से निकले थे वह यमुना के किनारे की तरफ दौड़ पड़े। जब तक गोताखोर और मदद पहुंची देर हो चुकी थी।
चोटी हाथ लगी तो बच गई जान
बागपत। जिला अस्पताल में भर्ती महिला ममता बताती है कि चीख-पुकार मची थी। वह भी डूब गई, एक बार उसे उछाल लगा तो उसके हाथ में पहले किसी का सूट आया, लेकिन छूट गया। दोबारा उछाल से वह बाहर निकली तो उसके हाथ में किसी की चोटी आ गई।
इसी के सहारे ही वह यमुना किनारे तक पहुंची। इसी तरह दूसरी महिला संतोष ने बताया कि उसके हाथ में किसी महिला की चोटी आई, जिसकी वजह से वह बाहर तक निकली। कालू ने बताया कि उसने डूबते समय एक साथी का हाथ पकड़ लिया था। उसने ही उसको यमुना किनारे लगा दिया।