हाईकोर्ट के शिक्षामित्रों के समायोजन रद्द करने के बाद प्रदेश सरकार तीन मॉडलों पर मंथन कर रही है, जबकि यहां के शिक्षामित्र सरकार के मॉडलों से संतुष्ट नहीं हैं।
उनका कहना है कि उन्हें इससे कोई मतलब नहीं है कि सरकार किस मॉडल पर मंथन कर रही है। उन्हें तो बस खोया सम्मान वापस चाहिए। शिक्षामित्रों की समस्या का समाधान करने के लिए प्रदेश सरकार त्रिपुरा मॉडल, महाराष्ट्र मॉडल व उत्तराखंड मॉडल पर मंथन करने में लगी हुई है।
वहीं, शिक्षामित्र सरकार के किसी भी मॉडल से संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि उन्हें उनका वही पुराना सम्मान वापिस चाहिए। जब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं होगा, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष राजेश पंवार का कहना है कि वैसे संगठन सरकार के किसी भी मॉ
डल पर सहमत नहीं है। उन्हें पहले की तरह सहायक अध्यापक ही बनाया जाए। संघ के मीडिया प्रभारी सचिन शर्मा का कहना है कि शिक्षामित्र सरकार के किसी भी मॉडल से संतुष्ट नहीं है। यूपी का मॉडल ही सबसे अच्छा था। शिक्षामित्रों को अपना सम्मान वापस चाहिए।
शिक्षामित्र बबीता ने कहा कि वह संघ के साथ है। संगठन का हर निर्णय उन्हें स्वीकार होगा। अंकुर ने कहा कि सरकार क्या कहती है और क्या करती है इसका कोई मायने नहीं हैं। शिक्षामित्रों को पहले वाली स्थिति ही चाहिए। शिक्षामित्र ललित शर्मा ने कहा है कि उन्हें उनका सम्मान वापस चाहिए।