बागपत। हम यहां फंस गए हैं, नीचे आग लगी है। हम कैसे आएं...हमें बचा लो। स्वाति और अनन्या आग लगने के बाद ऊपर मकान में फंस गईं। लोग उनको बचाने के लिए छत से होते हुए गए और चार जाल उखाड़ दिए, मगर सफलता नहीं मिली। सीढ़ियों के दरवाजे पर लगे ताले की चाबी नीचे दुकान में होने के कारण उसे खोला नहीं जा सका। इसके चलते मां-बेटी की मौत हो गई।
पड़ोस में रहने वाली रिया जैन ने बताया कि जब दुकान में आग लगी और धुआं निकलने लगा तभी स्वाति व उनकी बेटी अनन्या को बचाने के लिए शोर मचाना शुरू कर दिया। वे आधे घंटे तक चीखती रहीं, उनकी चीख सुनकर ही लोगों के साथ वह भी छत पर पहुंच गईं। तब भी स्वाति कह रही थी कि भैया हमें किसी तरह बचा लो, नहीं तो हम मर जाएंगे। इसके कुछ देर बाद आवाज आनी बंद हो गई।
पड़ोसी मोहित जैन ने बताया कि उनका बराबर वाली गली में घर है। जिस समय अंकुर की दुकान में आग लगने और सिलिंडर फटने के बारे में पता चला तो दौड़कर वहां पहुंचे। आग इतनी ज्यादा थी कि नीचे से ऊपरी मंजिल पर नहीं जा सके। इसके बाद अपने मकान की छत से जाकर दोनों को ऊपर लगे दरवाजे से बाहर निकालने की योजना बनाई और कई लोगों को लेकर छत पर पहुंच गया। वहां पर दरवाजा खोलने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली।
लोहे के जाल के बीच से आवाज लगाकर स्वाति भाभी को बुलाया और उन्हें बेटी के साथ ऊपर आने के लिए कहा। इसके बाद स्वाति अपनी बेटी अनन्या को लेकर ऊपर दरवाजे तक आई। दरवाजे पर ताला लगा हुआ मिला, जिसकी चाबी के बारे में स्वाति ने जानकारी नहीं होने की बात कही। इसके बाद स्वाति चाबी तलाशने की बात कहकर नीचे गई, लेकिन दोबारा उनकी आवाज नहीं आई। उन्होंने ऊपर से कई बार आवाज लगाई, लेकिन जवाब नहीं आया। इस तरह एक ताले में दोनों की जिंदगी फंसकर रह गई।