जिले में मलेरिया, टायफाइड और वायरल ने कहर बरपा रखा है। चार बच्चों की बुखार जान ले चुका है। इसके बावजूद स्कूल प्रशासन और न ही स्वास्थ्य विभाग इसके प्रति गंभीर हुआ है।
स्कूलों के आसपास गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। फिर भी स्कूलों में न तो फॉगिंग कराई गई और न ही आसपास सफाई। बच्चों को भी हाफ बाजू शर्ट, नेकर और स्कर्ट में ही स्कूल बुलाया जा रहा है।
जिले में चार स्कूली बच्चों जिनमें टटीरी का एक छात्र, खेकड़ा में हाईस्कूल की छात्रा, खट्टा में दस साल का छात्र और बालैनी की एक छात्रा की बुखार जान ले चुका है। इन बच्चों की मौतों के बावजूद जिले के स्कूल संचालक सतर्क नहीं हुए हैं। दिन में मच्छर के काटने से होने वाले डेंगू बुखार को भी गंभीरता से नहीं लिया गया।
बड़ौत रोड स्थित आमने-सामने स्थित दो स्कूलों के बीच गंदगी का ढेर लगा, मच्छरों की रोकथाम के कोई इंतजाम नहीं किए गए। अग्रवाल मंडी टटीरी और बागपत के बीच मेरठ रोड पर स्थित स्कूल का भी यही हाल है। चमरावल रोड स्थित पब्लिक स्कूल में अंदर तो सफाई का पूरा इंतजाम का दावा किया जा रहा है, लेकिन स्कूल के आसपास की हालत बीमारी का कारण बन रही है।
देहात क्षेत्र में स्थित स्कूलों में बीमारी का सबसे अधिक खतरा बना हुआ है। तालाब और गांव के कूड़े के ढेर के आसपास स्थित इन स्कूलों में मच्छरों का भारी प्रकोप है। एक भी स्कूल में न तो फॉगिंग कराई गई है और न ही दवा का छिड़काव कराया गया है।
स्वास्थ्य विभाग के पूरी आस्तीन के कपड़े पहनने की सलाह को भी नजरंदाज कर दिया है। बच्चे अभी भी हाफ बाजू की शर्ट, नेकर और स्कर्ट में ही आ रहे हैं। इन स्कूलों के सैकड़ों बच्चे बुखार की चपेट में है।