मोदीनगर के वोटरों ने खूब जताया भरोसा
मोदीनगर विधानसभा सीट पर भाजपा की पकड़ मानी जाती है तो रालोद के वहां से पहले विधायक बनते रहे हैं। इस बार रालोद-भाजपा का गठबंधन होने के कारण इसका ही फायदा वहां मिला और रालोद को वहां से बंपर वोट मिला।
इस बार वहां रालोद को 92 हजार 661 वोट मिले तो सपा को 45 हजार 941 वोट मिले, जबकि बसपा 22 हजार 691 वोट तक पहुंच सकी। इस तरह वहां से 46 हजार 713 वोट की वहां से रालोद को बढ़त मिली। जबकि वर्ष 2019 में करीब 37 हजार वोटों की बढ़त वहां से भाजपा को मिली थी।
छपरौली विधानसभा सीट ने खूब साथ निभाया
छपरौली को चौधरी परिवार का गढ़ कहा जाता है, क्योंकि विधानसभा चुनाव में वर्ष 1937 से लगातार वहां चौधरी परिवार या उनकी पार्टी का कब्जा है। लोकसभा चुनाव में भी चौधरी परिवार को वहां से अधिकतर तीस हजार से ज्यादा बढ़त मिलती रही है।
हालांकि पिछले दो लोकसभा चुनाव से स्थिति कुछ कमजोर हुई। मगर इस बार रालोद के साथ भाजपा होने के कारण रालोद को बड़ी बढ़त मिली। यहां से रालोद के डा. राजकुमार सांगवान को 99 हजार 927 वोट मिले।
सपा के अमरपाल शर्मा को 53 हजार 458 वोट मिले तो बसपा के प्रवीण बंसल को दस हजार 764 वोट दिए। इस तरह यहां से डा. राजकुमार सांगवान को 46 हजार 469 वोट की बढ़त मिली।
बड़ौत भी नहीं रहा पीछे, बागपत व सिवालखास ने भी जिताया
रालोद को जीत दिलाने में बड़ौत विधानसभा के वोटर भी पीछे नहीं रहे। बड़ौत विधानसभा में डाॅ. राजकुमार सांगवान को 92 हजार 495 वोट मिले। सपा के अमरपाल शर्मा को 54 हजार 196 वोट मिले। बसपा के प्रवीण बंसल को दस हजार 987 वोट मिले। यहां रालोद 38 हजार 299 वोट से आगे रही।
इस तरह ही बागपत विधानसभा सीट पर डाॅ. राजकुमार सांगवान को 87 हजार 825 वोट मिले। सपा के अमरपाल शर्मा को 76 हजार 401 वोट तो बसपा के प्रवीण बंसल 17 हजार 54 वोट मिले। यहां रालोद को 11 हजार 424 वोट की बढ़त मिली। सिवालखास विधानसभा में भी रालोद को काफी बढ़त मिली।