बड़ौत में एक रिम धुरा फैक्टी में काम करता मजदूर।
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एडीवी पार्ट्स पर जीएसटी 18 प्रतिशत लगाए जाने को लेकर उद्यमी एक जुलाई से हड़ताल पर थे। लेकिन, सोमवार को मेरठ में कमिश्नर वाणिज्य ग्रेड 1 से मिलने के बाद कोई समस्या हल न होने पर उन्होंने अपना कारोबार मंगलवार से शुरू कर दिया। हालांकि बिक्री ना के बराबर रही। उद्यमियों का कहना है कि इस टैक्स से गरीब, किसानों से भार पड़ेगा। क्योंकि, बैलगाड़ी का इस्तेमाल छोटे किसान करते हैं, जो आर्थिक तंगी से जूझते हैं।
जीएसटी लागू होने से पहले एडीवी (एनीमल ड्रीवन व्हीकल/पशु चालित वाहन) पर टैक्स नहीं था। लेकिन, जीएसटी लागू होने से अब इस पर 18 प्रतिशत टैक्स लगा दिया गया है। इसको लेकर एक जुलाई से एडीवी उद्यमियों ने अपना कारोबार बंद किया हुआ था।
सोमवार को एडीवी उद्यमी जयप्रकाश जैन, डॉ. योगेश जिंदल, घसीटूमल जैन, देवेंद्र गोयल आदि ने मेरठ जाकर वाणिज्य कमिश्नर ग्रेड 1 से इस संबंध में बात की, लेकिन कोई हल न दिखाई देने पर मंगलवार से अपना कारोबार शुरू कर दिया था। इससे उद्यमियों को जहां भारी आर्थिक उठानी पड़ी वहीं मजदूरों को रोजी रोटी के साधन पर असर पड़ा। मंगलवार को रिम-धुरे फैक्ट्रियों में कार्य शुरू होने से मजदूरों में खुशी दिखाई दी।
इस संबंध में में चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष जयप्रकाश जैन ने बताया कि एडीवी पार्ट का उपयोग गरीब किसान व मजदूर करते हैं। इन पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगने से किसानों व मजदूरों पर ज्यादा प्रभाव पड़ेगा।
वे गन्ने का भुगतान न होने के कारण पहले से ही परेशान हैं। इंडियन इंडस्ट्रीज बागपत के चेयरमैन डॉ. योगेश जिंदल ने कहा कि एडीवी पहले टैक्स मुक्त था। अब एकदम से 18 प्रतिशत जीएसटी टैक्स करना उचित नहीं है। जीएसटी की दरों में परिवर्तन करने का अधिकार केवल जीएसटी कौंसिल को है। इसलिए मुख्यमंत्री के माध्यम से अपनी बात उन्हें भेजी जाएगी।
उद्यमी घसीटूमल जैन ने कहा कि 18 प्रतिशत जीएसटी होने के कारण बोगी आदि की कीमत काफी बढ़ जाएगी। इससे खेती पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। एडीवी पार्ट पर टैक्स दर 5 प्रतिशत होनी चाहिए। उद्यमी देवेंद्र गोयल ने कहा कि एडीवी पार्ट्स पर 18 प्रतिशत कर होने मजदूरों और गरीब किसानों को परेशानी होगी।