राजस्व और कलक्ट्रेट कर्मचारियों ने किया कार्य बहिष्कार
बागपत। उत्तर प्रदेश राजस्व महासंघ और मिनिस्ट्रीरियल कलक्ट्रेट कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने कार्य का बहिष्कार करते हुए संयुक्त रूप से धरना दिया। तीन मांगों का ज्ञापन सौंपा गया। कार्रवाई न करने पर आंदोलन की चेतावनी दी।
उत्तर प्रदेश राजस्व महासंघ के अध्यक्ष तहसीलदार प्रसून कश्यप के नेतृत्व में दिए गए धरने में तहसीलदार ने बताया कि चकबंदी विलय एवं प्रतिनियुक्ति का विरोध किया जा रहा है। शासन ने माना है कि विभाग भ्रष्टाचार से ग्रस्त है जबकि स्थिति यह कि प्रदेश में 22.5 करोड़ का भला नहीं संभव है और न ही कृषि उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। 1100 गांवों में प्रथम चक्र की चकबंदी न होने से वर्ष 1925 के बंदोबस्त एवं बंदोबस्त नक्शों से कार्य हो रहा है। जिन गांवों में चकबंदी हो गई है वहां भी अधिकांश गांव के नक्शे जीर्णशीर्ण और अपठनीय है। चकबंदी प्रक्रिया के माध्य से होने वाले भूमि अभिलेख आदि को बंद कर मनमाने तरीके से राजस्व विभाग के पदों पर आमेलन, प्रति नियुक्ति का कोई औचित्य एवं आधार नहीं है।
संघ के जिलाध्यक्ष अजय शर्मा ने बताया कि वेतन उच्चीकरण कर वेतन विसंगतियों को दूर कराया जाए। 35 से 40 र्वा तक की सेवा के उपरांत भी पदोन्नति नहीं हो पा रही है। रिक्त पदों पर डीपीसी कराया जाना आवश्यक है। कर्म्चारियों ने चेतावनी दी मांग नहीं मानी तो आंदोलन करने को मजबूर होना पड़ेगा। मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन कलक्टे्रट में सौंपा गया। संयोजक देवेंद्र मिश्रा, महामंत्री राजकुमार, यदुवंश, लोकेश, सतीश कुमार, यज्ञदत्त शर्मा, विवेक कुमार शर्मा, सूर्यप्रताप सिंह, रोहित तोमर, धर्मेंद्र कुमार, अजेंद्र तोमर, काजोल, जितेंद्र गुप्ता, पंकज शर्मा मौजूद रहे। उधर कार्य बहिष्कार के कारण फरियादियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। दफ्तर खाली रहे, जिस वजह से लोग मायूस होकर लौट गए।
बागपत कलक्ट्रेट में धरना-प्रदर्शन के दौरान खाली पड़े कार्यालय- फोटो : BAGHPAT