बागपत, बड़ौत। भारतीय विरासत संस्थान की टीम ने कुर्डी टीले पर मंगलवार को उत्खनन किया। शोधार्थियों ने सबसे पहले टीले का भ्रमण कर ऊपरी सतह पर बिखरे पड़े महत्वपूर्ण साक्ष्यों को एकत्रित किया। वहां पर 12 ट्रेंच लगाकर खोदाई का कार्य किया जा रहा है।
भारतीय विरासत संस्थान के महानिदेशक डॉ. बुद्ध रश्मि मणि के निर्देशन में सोमवार को उत्खनन कार्य का शुभारंभ किया गया था। पुरातत्वविदों के अलावा टीम में 14 शोधार्थी भी शामिल हैं, जो एमए के छात्र हैं। ये सभी अलग-अलग तरह से खोदाई करने के विशेषज्ञ हैं, जिससे पुरावशेष खंडित नहीं हो सकें। मंगलवार को टीम के सभी सदस्यों ने तीन स्थानों पर बनाए गए ट्रेंच पर कार्य शुरू कर दिया। शोधार्थियों ने टीले का भ्रमण कर ऊपरी सतह पर बिखरे पड़े साक्ष्यों को एकत्रित किया। इन साक्ष्यों के आधार पर भारतीय विरासत संस्थान के महानिदेशक ने टीले को करीब चार हजार साल पुराना बताकर इतिहास की दृष्टि से खास बताया है।
टीम को उम्मीद है कि टीले के गर्भ से अहम पुरावशेष प्राप्त होंगे। उधर, तिलवाड़ा के आला टीले पर भी मंगलवार को उत्खनन का कार्य जारी रहा। यहां से भी अहम पुरावशेष जमीन से सुरक्षित बाहर नहीं आ सके हैं, जिनको निकालने के लिए छोटे औजारों से उत्खनन किया जा रहा है।