बागपत के बालैनी थाना के बुढ़सैनी गांव में मंदिर की विवादित जमीन पर बृहस्पतिवार को चुनावी रंजिश में बखेड़ा हो गया। नवनिर्वाचित प्रधान और पराजित प्रत्याशी के समर्थक आपस में भिड़ गए। इस घटना के संबंध में पुलिस ने एक युवक को हिरासत में ले लिया है। इसके विरोध में महिलाओं ने पुरा महादेव-अमीनगर सराय मार्ग जाम लगाकर अपनी नाराजगी का इजहार किया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस वालों से धक्कामुक्की की। हिरासत में लिए युवक को छुड़ा लिया। इस घटना को लेकर गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है।
ग्रामीणों के मुताबिक बुढ़सैनी निवासी कांशीराम ने वर्ष 2001 में अपनी 80 वर्ग गज भूमि मंदिर निर्माण के लिए दान कर दी थी। खाली पड़ी इस जमीन में गांव के ही मामचंद प्रजापति उपले रखते थे। प्रधान पद के लिए हुए चुनाव का परिणाम घोषित होने के बाद पराजित प्रत्याशी के समर्थक भूमि में मंदिर निर्माण की तैयारी मेें लग गए। उन्होंने गांव में चंदा एकत्र कर ईंटें ले आए।
मामचंद प्रजापति ने जमीन को खुद का बताते हुए मंदिर निर्माण पर एतराज जताया। साथ ही जमीन की चहारदीवारी करने के लिए ईंटें ले आया। इसी को लेकर नव नर्वाचित प्रधान सोनू देवी और पराजित प्रत्याशी फूलवती देवी के समर्थक बृहस्पतिवार को आपस में भिड़ गए। इसको लेकर वहां पर जमकर हंगामा हुआ। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने पराजित प्रत्याशी के एक समर्थक को हिरासत में ले लिया।
इससे गांव के लोग भड़क उठे। उन्होंने पुलिस पर आरोपी पक्ष से मिलकर जमीन पर अवैध कब्जा कराने का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। इस दौरान लोगों ने मार्ग जाम कर दिया। महिलाओं ने पुलिस से धक्कामुक्की कर हिरासत में लिए गए युवक को छुड़ा लिया। उनकी पुलिस वालों से काफी नोकझोंक हुई। पुलिस अफसरों ने मौके पर पहुंचकर मामला शांत कराया। बाद में गांव में पुलिस की मौजूदगी में पंचायत हुई। बालैनी थाना प्रभारी ओमवीर सिंह का कहना है कि यह जमीन वापस कांशीराम को दी जाएगी। इसके बदले गांव के लोग मामचंद को 40 हजार रुपये इकट्ठा करके देंगे।
मंदिर की जमीन को वापस करने का निर्णय
इतना बवाल होने के बाद पुलिस अधिकारियों ने कार्रवाई कराने की बजाय पंचायत कर मामला सुलझाने का मशविरा दे डाला। इसके बाद प्राइमरी स्कूल में पंचायत कराई गई। पुलिस की मौजूदगी में हुई पंचायत में दोनों पक्षों के बीच मंदिर की जमीन को वापस करने का निर्णय लिया गया।
मंदिर के लिए कांशीराम द्वारा दी गई भूमि को उसे ही वापस कर दिया गया। मामचंद को इस जमीन पर किए गए खर्च का भुगतान चंदे से करने का निर्णय लिया गया।
मंदिर की जमीन ही बेच दी लोगों ने
बागपत। पुलिस के मुताबिक पंचायत में पता चला कि मंदिर में दी गई जमीन को गांव के ही कुछ लोगों ने मामचंद को 30 हजार रुपये में बेच दिया था। दस हजार रुपये में मामचंद ने मिट्टी से जमीन का भराव कराया था।