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कोरोना काल में बढ़ गयी धार्मिक पुस्तकों की ब्रिकी

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रामायण, शिवपुराण और भागवत गीता पढ़ने को आगे आये युवा
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बड़ौत। देश में फैली कोरोना महामारी ने लोगों को धार्मिक और आध्यात्मिकता की राह पर चलने का रास्ता दिखाया है। इसका जीता जागता सबूत बाजारों में धार्मिक पुस्तकों की बिक्री का अधिक होना है। माना जा रहा है कि जनता ने कोरोना से बचने और सुरक्षित रहने के लिए घरों में कैद होकर धार्मिक पुस्तकों को अध्य्यन किया। धार्मिक पुस्तकों के प्रति महिला पुरुष ही नहीं बल्कि बच्चों में भी रुचि देखी जा रही है। इसका असर आने वाले समय में देखने को मिलेगा।
रामायण, शिवपुराण और श्रीमद्भागवत से खूब हुई खरीद
- कोरोना काल में रामायण, शिव पुराण, श्रीमदभागवत की पुस्तकों की बिक्री में भारी इजाफा हुआ है। मार्च माह से पहले और कोरोना संक्रमण काल में हुई धार्मिक पुस्तकों की बिक्री 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ी है। इससे पुस्तक विक्रेताओं के चेहरे पर भी खुशी के भाव साफ नजर आ रहे हैं। नगर में पुस्तक विक्रेताओं की लगभग 40 दुकानें हैं। जिनमें प्रतियोगी पुस्तकों के साथ-साथ, रामायण, श्री मद्भागवत गीता, शिव पुराण ही नहीं बल्कि बाइबल, कुरान आदि की पुस्तकों की बिक्री में भी बढ़ोत्तरी हुई है।
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ये बोले पुस्तक विक्रेता--
- वीके प्रकाशन के संचालन राजेश जैन भारती का कहना है कि यह बात सही है कि धार्मिक पुस्तकों को पढ़ने का प्रचलन बढ़ा है। खास बात यह है कि युवा भी इन धार्मिक पुस्तकों को खरीद रहे हैं।
- नीरज पुस्तक सदन के संचालक पंकज जैन का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में इन पुस्तकों की ब्रिकी लगभग बंद हो गई थी। इक्का-दुक्का ग्राहक ही इन पुस्तकों को खरीदने आते थे। लेकिन जब से देश में कोरोना वायरस फैला है तब से लोग इन किताबों को खरीद रहे हैं और पढ़ भी रहे हैं।
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- आर्यन बुक एजेंसी के संचालक सचिन जैन का कहना है कि बुजुर्गों के अलावा युवा भी रामायण, श्रीमद्भागवत गीता, शिव पुराण जैसी धार्मिक पुस्तकों को खरीद रहे है।
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