- बागपत में पिछले कुछ दिनों में पिता, मां, भाई, पत्नी, चाचा ही अपनों की कर चुके हत्या, कई मामले सामने आए
- किसी ने अवैध संबंधों के कारण अपनों को मार डाला तो कहीं गुस्से में उतार दिया अपनों को मौत के घाट
- मनोचिकित्सक ने कहा कि तनाव भरी जिंदगी में सामूहिक परिवार नहीं होने के कारण गुस्सा बढ़ने से कर रहे ऐसी घटनाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। जिले में लगातार खून के रिश्ते खूब दागदार हो रहे है। पिछले कुछ महीनों से ऐसे मामले सबसे ज्यादा सामने आए है, जिनमें पिता, मां, भाई, चाचा, बेटा ही अपनों का खून बहा रहे है। किसी ने अवैध संबंधों के कारण अपनों को मार डाला तो कहीं गुस्से में अपनों को मौत के घाट उतार दिया गया। ऐसे ही मामलों को रोकना पुलिस के लिए भी बड़ी चुनौती है। वहीं, मनोचिकित्सक ऐसे मामलों के लिए तनाव भरी जिंदगी में सामूहिक परिवार नहीं होने के कारण गुस्सा जल्दी आना कारण मानते है।
इन मामलों में हुआ रिश्तों का कत्ल
- दाहा गांव में रिटायर्ड सीओ ने अपने बेटे की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
- खेकड़ा में बेटे ने अपने पिता की हत्या करा डाली थी।
- बिनौली के शाहपुर बाणगंगा में नलकूप ऑपरेटर की बेटे ने हत्या कर दी थी।
- बिजरौल में पत्नी ने अवैध संबंधों में पति की हत्या कर दी थी।
- बिनौली ने भाई ने अपनी बहन को मार डाला था।
- असारा में चाचा ने भतीजे को मार दिया था।
- बालैनी में बुधवार को मां ने बेटी को मार दिया ।
बेटी संग पहले भी कई बार बुरी तरह कर चुकी थी मारपीट
बालैनी। बाखरपुर बालैनी में महिला मोहिनी ने अपनी बेटी शिवी की गला दबाकर हत्या की है। वह पहले भी कई बार बेटी के साथ बुरी तरह मारपीट कर चुकी है। एसपी नीरज कुमार जादौन के अनुसार पति रोहित ने पुलिस को बताया कि उसकी पत्नी मोहिनी आए दिन घर में विवाद रखती थी। वह झगड़ा करने के साथ ही बेटी के साथ भी मारपीट करती थी। कई बार पहले भी उसे बुरी तरह पीट चुकी है। उसने कई बार पत्नी को समझाया, लेकिन वह अपनी हरकत से बाज नहीं आई।
पिछले कुछ दिनों में अधिकतर ऐसे मामले हुए है, जिनमें हत्या करने वाले परिवार के सदस्य है। इस तरह की घटनाओं का बड़ा कारण परिवारों में दूरियां बढ़ना है। परिवार में होने वाली इस तरह की घटनाओं को रोकना पुलिस के लिए चुनौती है। ऐसे में लोगों को अपने गुस्से पर काबू रखना होगा। - नीरज कुमार जादौन, एसपी
सामूहिक परिवार नहीं होना, इस तरह की घटनाओं का बड़ा कारण है। इसके अलावा कोरोना काल में लोग तनाव में रहने लगे और इससे गलत विचार पैदा होने लगे है। ऐसे लोगों को नींद कम आती है और उनको गुस्सा ज्यादा आता है। वह गुस्से में ऐसा कर देते है। ऐसे लोगों को रोजाना व्यायाम करना चाहिए, पूरी नींद लेनी चाहिए और लोगों के बीच ज्यादा रहना चाहिए। - डा. अजय कुमार, मनोचिकित्सक