एक माह में केवल एक बेसहारा ने गुजारी रात
संवाद न्यूज एजेंसी
खेकड़ा। कड़ाके की ठंड के बावजूद खेकड़ा नगर में बेसहारा लोग रैन बसेरों की ओर रुख नहीं कर रहे है। हर समय रैन बसेरे खाली पडे़ रहते है। यहां तैनात कर्मचारी शरण लेने वालों की बांट जोहते रहते है। अब तक एक ही बेसहारा ने रैन बसेरे में एक रात गुजारी है।
अमर उजाला टीम ने मंगलवार की रात दस बजे नगरपालिका द्वारा पेयजल टंकी परिसर में महिला और पुरुषों के लिए बनाए गए रैने बसेरों का जायजा लिया। पुरुषों के रैन बसेरे की देखरेख नगरपालिका कर्मी महबूब अली, नवीन सिंह और रामबीर करते है। महिला रैन बसेरे की देखरेख नगरपालिका कर्मी सलोचना देवी करती है। यह रैन बसेरे 25 नवंबर से अस्तित्व में है। इनमें बिस्तर और चारपाई बिछाए गए है। गर्म कंबल और गद्दे डाले गए है। साथ ही हीटर और लाइट की भी व्यवस्था की गई है। कड़ाके की ठंड पड़ रही है। इससे लोगों का जीना मुहाल हो गया है।बावजूद इसके बेसहारा लोग इन रैन बसेरों की ओर रुख नहीं कर रहे है।
ऐसा नहीं है कि क्षेत्र में मजदूर तबका और बेसहारा लोग नहीं है। खेकड़ा नगर क्षेत्र में सैकड़ों में इनकी संख्या है। इनमें से कोई भी रैन बसेरों में नहीं पहुंच रहा है। अब तक पुरुष रैन बसेरे में केवल बड़ौत क्षेत्र के गांव किरठल निवासी एक व्यक्ति सुंदरपाल ने ही 22 दिसंबर को एक रात गुजारी है। रैन बसैरा प्रभारी महबूब अली का कहना है कि वह रात्रि में रैन बसेरों में बेसहारा लोगों को इंतजार करते रहते है, लेकिन कोई भी उनमें नहीं पहुंच रहा है।