विश्व रेबीज दिवस पर विशेष
बड़ौत सीएचसी पर बदहाल व्यवस्था, हमेशा बनी रहती है एंटी रेबीज इंजेक्शन की कमी
मरीजाें को निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने को होना पड़ता है मजबूर
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। रेबीज जानलेवा बीमारी हैं, जो कुत्ते और बंदर आदि के काटने से फैलती है। अगर सही समय पर इसका इलाज न किया जाए तो जानलेवा साबित हो सकती है। मगर, बड़ौत सीएचसी में इसके इलाज के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। हालात ऐसे है कि माह में पांच से सात दिन ही यहां रेबीज के इंजेक्शन उपलब्ध रहते है। ऐसे में मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराना पड़ता है।
बड़ौत सीएचसी अधीक्षक डॉ. विजय कुमार का कहना है कि कुत्ते, बिल्ली या किसी अन्य जानवर के काटने पर बिल्कुल भी लापरवाही न बरतें। अगर हल्का सा भी निशान है तो एंटी रेबीज इंजेक्शन जरूर लगाने चाहिए। कई बार कटे अंग पर पालतू जानवर के चाटने या खून का जानवर के लार से सीधे संपर्क से भी ये रोग फैल सकता है। पहले दिन, तीसरे दिन और सातवें दिन एआरबी लगवानी चाहिए।
बड़ौत सीएचसी में हर दिन लगाए जाते 60 से 70 इंजेक्शन
बड़ौत सीएचसी में प्रत्येक दिन में 60 से 70 मरीज एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने आते हैं। एआरबी लगवाने के लिए लंबी लाइनें लगती हैं। सीएचसी अधीक्षक डॉ. विजय कुमार का कहना है कि मरीजों के सापेक्ष इंजेक्शन की उपलब्ध कम रहती है। सीएचसी में पहुंचने वाली इंजेक्शन की आपूर्ति पांच से सात दिन में ही खत्म हो जाती है। इसके बाद दोबारा डिमांड भेजी जाती है।
बागपत सीएचसी में एक सप्ताह से खत्म थे इंजेक्शन
बागपत। जिले में पिछले एक सप्ताह से एंटी रेबीज इंजेक्शन की सप्लाई नही मिल रही थी। इस कारण बागपत सीएचसी पर इंजेक्शन लगवाने के लिए आने वाले लोगों को बिना इंजेक्शन लगवाए की लौटना पड़ रहा था। शनिवार को शासन स्तर से एंटी रेबिज की सप्लाई भेज दी गई। सप्लाई मिलने पर सीएचसी पर 50 इंजेक्शन की सप्लाई भेजी गई है। बागपत सीएचसी अधीक्षक डॉ विभाष राजपूत ने बताया कि सप्लाई न आने के कारण पिछले एक सप्ताह से एंटी रेबिज के इंजेक्शन उपलब्ध नही थे। इंजेक्शन के अभाव में प्रतिदिन 15 से 20 मरीज वापस लौट रहे थे।
प्राइवेट अस्पतालों में महंगा इलाज
सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज इंजेक्शन मात्र एक रुपये की पर्ची पर लगा दिया जाता है। मगर, निजी अस्पतालों में इसके लिए 250 से 300 रुपये लिए जाते है। दवाइयां अलग से लिखी जाती है।