सरकार ने तहसील दिवस की व्यवस्था लोगों की समस्याओं के जल्द निदान के लिए कराई थी, लेकिन यहां आने वाले प्रार्थना पत्रों का निस्तारण धरातल पर नहीं किया जा रहा है। अधिकारी अपने दस्तावेज में ही समस्याओं का निस्तारण दिखाकर वाहवाही लूट रहे हैं। एसडीएम ने इसकी जांच कराने की बात कही है।
तहसील के रिकॉर्ड के अनुसार, जनवरी 2016 से अप्रैल 2016 तक दिखाया गया समस्याओं का निस्तारण धरातल पर खरा नहीं उतरता। जनवरी माह में हुए तहसील दिवसों में 185 प्रार्थना पत्र आए, जिनमेें से 167 का निस्तारण दर्शाया गया है और आठ शिकायतें शेष है।
इसी प्रकार माह फरवरी में तहसील दिवस में 64 शिकायतों मिलीं। इन सभी का निस्तारण दिखाया गया है। मार्च माह के तहसील दिवसों में 87 शिकायतों में से 86 का निस्तारण दिखाकर एक को शेष बताया गया है। इसी तरह, अप्रैल माह में 125 शिकायतों में से 106 का निस्तारण दिखाकर 19 को शेष बताया गया है।
तहसील दिवसों में फरियादी समस्याओं को लेकर कई-कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन निस्तारण नहीं किया जा रहा है। तहसील में आए पलड़ी निवासी यामीन खां ने बताया कि वह जल निगम के खिलाफ तहसील दिवस में तीन माह से पत्र दे रहा है, लेकिन उसे न्याय नहीं मिला।
बावली गांव के सेवाराम तोमर ने बताया कि चार माह से वह राशन कार्ड बनवाने की शिकायत कर रहा है, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई। रंछाड़ गांव के धन सिंह का कहना हे कि गांव में हाईवोल्टेज के संबंध में शिकायत की जा चुकी है, लेकिन समस्या का निदान नहीं हुआ है।
अधिकारी कहिन
इस संबंध में एसडीएम यशवर्धन श्रीवास्तव का कहना है कि शिकायतों के निस्तारण के लिए 15 दिन का समय संबंधित अधिकारियों को दिया जाता है। निस्तारण न करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा जाता है। यदि समस्याओं का निस्तारण सिर्फ कागजों में दिखाया जा रहा है तो इसकी जांच कराई जाएगी।