बड़ौत। जनपद में हीमोग्लोबिन की कमी होने के कारण गर्भवती महिलाएं एनीमिया से ग्रस्त हो रही हैं। इस कारण प्रसव के दौरान बच्चे या मां की जान को खतरा बढ़ा है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से एनीमिया से ग्रस्त गर्भवती महिलाओं को नियमित आयरन का टीका दिया जा रहा है, ताकि उनके एचबी का स्तर सुधारा जा सके। साथ ही चिकित्सक उन्हें नियमित रूप से पौष्टिक खुराक लेने की सलाह दे रहे हैं।
जनपद के स्वास्थ्य विभाग में 25000 गर्भवती महिलाएं पंजीकृत हैं। इनमें से 2550 महिलाएं एनीमिया से ग्रस्त हैं। इनमें हीमोग्लोबिन यानी रक्त का स्तर सात एचबी से भी कम है। ऐसे में होने वाले बच्चे को भी एनीमिया ग्रस्त होने का खतरा हो सकता है या उसे अन्य बीमारियां भी हो सकती हैं। इनके अलावा शेष महिलाओं में से करीब 40 प्रतिशत को माइनर एनीमिया है, यानी इनका रक्त स्तर आठ से दस एचबी के बीच है। इन महिलाओं को नियमित रूप से आयरन और कैल्शियम की निशुल्क दवा दी रही हैं। डॉक्टरों के अनुसार गर्भवती महिलाओं में सामान्य रूप से 10 से ज्यादा एचबी होना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान सही खानपान नहीं लेने के कारण ही गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की शिकायतें आ रही हैं। उनके अनुसार महिलाओं को रोजाना की डायट पर भी ध्यान देना चाहिए, ताकि बच्चे के विकास में कोई कमी न आए।
लोहे की कढ़ाई में बना भोजन सेवन करें गर्भवती
बड़ौत सीएचसी अधीक्षक डॉ. विजय कुमार के अनुसार गर्भवती महिलाओं के एनीमिया ग्रस्त होने से पेट में पल रहे बच्चे की वृद्धि पर असर होता है। ऐसे में बच्चे के विकास के लिए पर्याप्त रक्त नहीं मिल पाएगा। प्रसव के दौरान प्रसूता में अगर रक्त स्तर कम हो या रक्त प्रवाह ज्यादा हो जाए तो मां और बच्चा की जान खतरे में पड़ सकती है। समय रहते एनीमिया को ठीक न किया जाए तो बच्चे को भी एनीमिया की शिकायत हो सकती है। गर्भवती महिलाओं को गर्भकाल के पहले माह से ही हीमोग्लोबिन की जांच नियमित रूप से करवानी चाहिए। गर्भावस्था में महिलाओं को रोजाना लोहे की कढ़ाई में बने खाने का सेवन करना चाहिए। लोहे में मौजूद आयरन के तत्व खाने में शामिल हो जाते हैं, इससे शरीर को आयरन मिलता है। इससे खून का स्तर बढ़ता है।
हर माह की नौ तारीख होती है गर्भवती की जांच
सीएमओ डॉ. आरके टंडन ने बताया कि महिलाओं को एनीमिया मुक्त करने के लिए चलाए गए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत हर माह की नौ तारीख को गर्भवती महिलाओं की जांच के लिए कैंप लगाया जाता है। कैंप में महिलाओं का एचबी, बीपी, यूरिनल, शुगर, एचआईवी, एचसीवी और अन्य टेस्ट भी कराए जाते हैं।