- अपराध रोकथाम रजिस्टर पर नहीं चढ़ रहा जिले में अपराध रिकॉर्ड
- संजय खोखर के परिवार की रंजिश भी नहीं थी रिकॉर्ड में
अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। रंजिशों में होने वाली हत्याओं पर काबू पाने के लिए थानों में रंजिश रजिस्टर बनवाए गए थे। मगर, पिछले छह-सात साल से रजिस्टर अपडेट नहीं किए जा रहे हैं। पुलिस विभाग में कंप्यूटर आ जाने से रंजिश रजिस्टर की अनदेखी कर दी गई है। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष संजय खोखर के परिवार की रंजिश भी रिकॉर्ड में नहीं थी।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रंजिशों में होने वाले खून-खराबे को रोकने लिए रंजिश रजिस्टर बनाए गए थे। मकसद था कि हर गांव की रंजिश का रजिस्टर में जानकारी हो। वर्तमान स्थिति अपडेट रहनी चाहिए। मगर, पिछले करीब छह-सात साल से इन महत्वपूर्ण रजिस्टरों को अपडेट नहीं किया जा रहा है। थानों में कर्मचारी बदलते रहे और काम रजिस्टरों के बजाए कंप्यूटर पर पहुंच गया। कई थानों के मुंशी रजिस्टर के विषय में अधिक नहीं जानते। रजिस्टर लंबे समय से अपडेट नहीं होने के कारण पुलिस अधिकारियों तक भी सही जानकारी नहीं पहुंच पाती है।
छपरौली थाने में लूंब और लुहारा की रंजिश
बागपत। छपरौली थाना क्षेत्र में रंजिश के चलते भाजपा नेता संजय खोखर की हत्या कर दी गई। लेकिन पुलिस के रजिस्टर में यह रंजिश दर्ज ही नहीं थी। जबकि दोनों पक्षों का पहले झगड़ा हो चुका था। दोनों तरफ से मुकदमे दर्ज हुए थे। खुद पुलिस ने दो बार जांच की। पुलिस रिकॉर्ड में शेरपुर लुहारा और लूंब गांव की रंजिश का ही जिक्र है।
अपराध का रिकॉर्ड अपराध रोकथाम रजिस्टर में दर्ज किया जाता है। पुराने रजिस्टरों को भी समय-समय पर पुलिस अधिकारी खंगालते हैं। - ओमपाल सिंह, सीओ सदर।