उत्तम मार्दव धर्म अंगीकार कर पूजा-अर्चना की
बड़ौत। दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन जैन अनुयायियों ने उत्तम मार्दव धर्म को अंगीकार कर विशेष पूजा-अर्चना की। नगर के जैन मंदिरों में चल रहे विधानों में अर्घ्य समर्पित किए।
अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर मंडी में आर्यिका पवित्रमति के ससंघ सानिध्य में आदिनाथ विधान का आयोजन किया गया। विधानाचार्य पंडित अभिषेक शास्त्री के निर्देशन में सौधर्म इंद्र विक्रम सैन जैन द्वारा अजितनाथ भगवान की जिन प्रतिमा का अभिषेक किया व शांतिधारा की। इसके बाद पीत वस्त्रधारी जैन श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से जिनेंद्र भगवान की पूजा की। जिसमें नवदेवता पूजन, अजितनाथ भगवान पूजन तथा दशलक्षण पूजन व सोलहकरण की पूजाएं की गईं। विधान के पूजन में संगीतकार सुंदर गुरु ने भजनों की प्रस्तुति की और मांडले के मध्य 72 अर्घ्य सौधर्म इंद्र विक्रम सैन जैन द्वारा मांडले पर समर्पित किए गए। विधान के मध्य बोलते आर्यिका पवित्रमति माता ने कहा कि उत्तम मार्दव का तात्पर्य परिणामों में निर्मलता कोमलता से हैं। विधान में विपिन जैन, अरुण जैन, वरदान जैन, महेंद्र जैन, प्रवीण जैन, मुकेश जैन, प्रदीप जैन, सरला जैन, इंद्राणी जैन, डिंपल जैन आदि उपस्थित थे। शाम को मंदिर में संगीतमय आरती व सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति की गई। जिसमें पुरस्कार सुनील जैन द्वारा किया गया।
तेरहदीप महामंडल विधान का आयोजन
बड़ौत। दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में जैन धर्मावलंबियों द्वारा उत्तम मार्दव धर्म को अंगीकार किया गया। आर्यिका प्रत्यक्षमती माता के सानिध्य में चल रहे तेरह दीप महामंडल विधान में श्रद्धालुओं ने सबसे पहले भगवान चंद्रप्रभु का अभिषेक किया। इसके पश्चात नित्य नियम व दशलक्षण धर्म की पूजा पंडित अंशुल जैन शास्त्री जयपुर के निर्देशन में संगीत की मधुर लहरियों के बीच पीत वस्त्र धारण कर बड़े ही भक्ति भाव से की। बीच-बीच में श्रद्धालु नृत्य भी कर रहे थे। इसके पश्चात तेरहदीप महामंडल विधान की चार पूजा की गई। दोपहर में पंडित अंशुल जैन शास्त्री द्वारा तत्वार्थ सूत्र की वाचना की गई। दिगंबर जैन छोटा मंदिर में भी श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की। इसके अतिरिक्त दिगंबर जैन अतिथि भवन में श्रद्धालुओं ने प्रत्यक्ष मति माताजी के सानिध्य में पूजा अर्चना की रात्रि में दिगंबर जैन बड़ा मंदिर जी में श्रद्धालुओं ने भगवान चंद्रप्रभु की आरती संगीत की मधुर लहरियों के बीच भक्ति पूर्वक की। इसके पश्चात पंडित अंशुल जैन शास्त्री द्वारा उत्तम मार्दव धर्म पर प्रवचन किया गया। इसके पश्चात श्री विद्यासागर गो सेवा समिति के सदस्यों द्वारा जैन भजन प्रतियोगिता आयोजित की गई। जिसमें छोटे-छोटे बच्चों ने जैन धर्म के भजन प्रस्तुत किए। इनमें विजयी बच्चों को संस्था के द्वारा पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर सभी जैन मंदिरों में बिजली की विशेष सजावट की गई पूरे नगर को दुल्हन की तरह सजाया गया। बंदरों पर की गई लाइट अलग ही छटा बिखेर रही थी समस्त नगर में जैन श्रद्धालुओं के द्वारा विशेष पूजा अर्चना की जा रही है इस अवसर पर दिगंबर जैन समाज समिति के अध्यक्ष प्रवीन जैन, मंत्री अतुल जैन सर्राफ, मनोज जैन, अंकुर जैन, पुनीत जैन, आलोक जैन, सतीश जैन, सचिन जैन, अतुल जैन, विपुल जैन, सुभाष जैन, वीर बहादुर जैन, विक्की जैन, मुकुल जैन, संदीप जैन, सुरेंद्र जैन, नवीन जैन, विवेक जैन, सुनील जैन, धनेंद्र जैन आदि उपस्थित थे।
श्रीजी के अभिषेक के साथ नित्य नियम पूजा की
बड़ौत। पार्श्वनाथ मंदिर नेहरू रोड में दशलक्षण महापर्व के पावन उपलक्ष्य में हो रहे तेरहदीप विधान में सर्वप्रथम श्री जी का अभिषेक व शांतिधारा की गई नित्य नियम पूजा पाठ कर विधान शुरू हुआ। इस अवसर पर पंडित नेमचंद ने धर्मोपदेश देते हुए कहा कि आज दशलक्षण पर्व का दूसरा दिन उत्तम मार्दव धर्म है । सरल शब्दों में मार्दव अहंकार का विपर्यय है, जब व्यक्ति में ‘मैं’ की भावना निष्कासित होने लगती है, तब उसके भीतर विनयशीलता के स्त्रोत खुलने लगते हैं। मार्दव एक ऐसा चारित्रिक गुण है जो व्यक्ति में एक अपूर्व रासायनिक बदलाव घटित करता है जिसके असर से व्यक्ति का कोमली करण होता है। मार्दव का मतलब ही है अहंकार का ऐसा संतुलित विसर्जन कि फिर वह प्रयत्न करने पर भी अपने को पुन: बदल न सके। विधान में सत्येंद्र जैन अनिल जैन नेमचंद जैन विनय जी ऋषभ , लता, उषा, गीता आदि शामिल थे।