दिल्ली-यमुनौत्री हाईवे के निर्माण ने कई परिवारों को घर से बेघर कर दिया है।
जिला मुख्यालय से सटे सिसाना गांव के दो दर्जन परिवार पांच साल पूर्व सड़क पर आ गए थे। उनमें से कई किराए पर रह रहे हैं, तो कई गांव ही छोड़कर चले गए। लेकिन अभी तक हाईवे का निर्माण नहीं हुआ। दिल्ली-यमुनौत्री हाईवे के चौड़ीकरण के लिए वर्ष 2012 में ध्वस्तीकरण का कार्य शुरू हुआ था।
महिला प्रधान हीरो देवी के पुत्र सुनील चौहान का कहना है कि हाईवे ने उसके गांव के करीब दो दर्जन लोगों को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है। कई लोग तो गांव से चले भी गए है। जिन लोगों के मकान हाईवे में चले गए है। उनको जमीन दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
ढाई गज जमीन बची
सिसाना गांव के राजू का कहना है कि उनका हाईवे किनारे 150 वर्ग गज का मकान था। जो हाईवे निर्माण में चला गया। मात्र ढाई वर्ग गज ही जमीन बची है। उसमें छोटी सी परचून की दुकान करके अपने बच्चों का पालन पोषण करता है। उनका परिवार गांव में एक व्यक्ति के घेर में किराए पर रहता है।
चारों भाइयों के मकान हाईवे की जद में आए
सिसाना के सुमारी का कहना है कि हम चार भाई है। इनमें प्रकाश, रोहताश और तारे है। चारों के मकान हाईवे में चले गए। तभी से वे किराए पर रह रहे हैं। गुहार भी लगाई लेकिन प्रशासन ने अभी तक उनकी खैर खबर लेने की जरूरत नहीं समझी है।
बगैर नोटिस के ही तोड़ दिए थे मकान
सरस्वती पत्नी बाबूराम का कहना है कि प्रशासन ने बगैर नोटिस दिए ही उनके मकान को ध्वस्त कर दिया था। अब वे बेघर हो गए हैं। वे कहां रहेंगे इसके बारे में किसी ने नहीं सोचा। उसके अनुसार वे चाहते हैं कि प्रशासन उनको रहने के लिए मकान दें।