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प्रतिरोधक क्षमता वृद्धि के लिए लोगों ने बदला खानपान का तरीका

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प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए लोगों ने बदला खानपान का तरीका
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पहले से ज्यादा बरती जा रही सतर्कता
बड़ौत। कोरोना से बचाव में देशी नुस्खे लोगों को खूब भा रहे हैं। सर्दी व अस्थमा से बचाव के लिए दाल चीनी, काली मिर्च, मुलैठी व सोंठ की बिक्री बढ़ गई है। मांग बढ़ने के साथ पिछले वर्ष की तुलना में इनके दामों में भारी गिरावट देखने को मिली है। वहीं गिलोय, अश्वगंधा समेत औषधी उत्पादों की मांग चार गुना बढ़ गई है। इनके दाम गत वर्ष की तुलना में आसमान छू रहे हैं।
मार्च में कोरोना वायरस ने दस्तक दी। इसके बाद लॉकडाउन में आवागमन बंद रहा। मसाले व मेवा की आवक भी बंद हो गई, लेकिन मांग बढ़ गई। इससे भाव चढ़ गए हैं, लेकिन अनलॉक में आवक शुरू होते ही भाव नीचे आ गए। गत वर्ष सितंबर में जो भाव थे। वर्तमान में उसकी तुलना में 20 से 40 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। काली मिर्च पिछले वर्ष सितंबर में 600 रुपये किलो थी लेकिन इस वर्ष सितंबर में 380 रुपये किलो, दाल चीनी 450 से 300 रुपये किलो पर आ गई। मुलैठी 250 से 225 पर आ गई। सोंठ 200 रुपये से इस वर्ष 300 रुपये प्रति किलो पहुंच गई। लौंग 750 से इस वर्ष 500 पर आ गई। मुनक्का 450 से इस वर्ष 300 पर आ गया। अश्वगंधा 350 से इस वर्ष 650 पर पहुंच गया। गिलोय 100 रुपये से 140 रुपये प्रति किलो बिक रहा है।
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ये बोले दुकानदार------
मेवा मसाले के दुकानदार पंकज ने बताया कि कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान माल की आवक कम रही, इससे मसालों के दाम बढ़े। अनलॉक में मांग के साथ आवक भी बढ़ी है। इससे गत वर्ष के सापेक्ष भाव काफी कम है। गिलोय व अश्वगंधा की मांग चौगुनी हो गई है।
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आयुर्वेद में रसोई सबसे बड़ा डाक्टर
बड़ौत। डॉ संजीव ने बताया कि आयुर्वेद में रसोई को सबसे बड़ा डॉक्टर माना गया है। दमा संबंधी रोगों व शरीर की प्रतिरोधक क्षमता वृद्धि के लिए काली मिर्च, लौंग, मुनक्का, गिलोय, तुलसी का काढ़ा काफी हितकर है। खांसी समेत अन्य रोगों में मुलैठी व सोंठ संजीवनी का काम करती है।
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