प्रत्येक बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल में 25 लोगों की करते हैं काउंसिलिंग
आस पड़ोस में कोरोना के मरीज मिलने पर भी पहुंच रहे हैं लोग
अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। कोरोना की जांच में तेजी आने के बाद संक्रमण के मामले भी सामने आ रहे हैं। हर जगह कोरोना को लेकर नई बहस है। सितंबर महीने में बीमारी के पीक पर जाने की फिर से बहस छिड़ने लगी है। यही वजह है कि आसपास में कोरोना का मरीज मिलने के बाद लोग सहम रहे हैं। डर का ऐसा माहौल है कि मनोचिकित्सकों के पास कोरोना से डरे हुए लोगों के मामलों की संख्या बढ़ गई है।
प्रत्येक बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल के मनोरोग विभाग में ओपीडी चलती है। कोरोना के मामलों में तेजी से बढ़ोत्तरी के बाद अब यहां सिर्फ कोरोना की जानकारी लेने और खुद के बचाव के विषय में जानने के लिए ही लोग पहुंच रहे हैं। परामर्शदाता मनोचिकित्सक डॉ. अजय कुमार कहते हैं कि ओपीडी में 25 मरीजों की काउंसिलिंग करते हैं। अधिकतर मामले ऐसे आ रहे हैं, जिनमें लोग कोरोना से डरे हुए हैं। आसपास के घरों में कोरोना का मरीज मिलने के बाद जो लोग आते हैं, वह बेहद डरे हुए होते हैं। खुद की कोरोना की जांच कराने की भी जिद करते हैं। कई बार संतुष्टि के लिए जरूरत पड़ने पर जांच भी कराई गई है।
सोशल मीडिया ने बना दिया फोबिया
बागपत। डॉ. अजय कुमार कहते हैं कि सोशल मीडिया पर लोगों को आधी अधूरी जानकारी मिलती है। जिस कारण मामले और अधिक बिगड़ रहे हैं। लोग जानकारी और जागरूकता के अभाव में डर जाते हैं। इसलिए कहीं न कहीं सोशल मीडिया की जवाबदेही भी तय होनी ही चाहिए।
कोरोना संक्रमितों की भी करते हैं काउंसिलिंग
डॉ. अजय कुमार बताते हैं कि कोरोना संक्रमित मरीजों की भी वह मोबाइल कॉल के माध्यम से काउंसिलिंग कर रहे हैं। मरीजों को ट्रेस से दूर रहने की सलाह दी जाती है। पहला मकसद यह होता है कि मरीज तनाव में नहीं रहना चाहिए। अगर मरीज तनाव में आएगा तो मुश्किल बढ़ेगी।