बिजरौल में उखाड़े गए हंैडपंप।
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बागपत। बड़ौत और बागपत ब्लॉक में प्रदूषित जल देने वाले 125 हैंडपंप उखाड़ने का जगह-जगह ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। ग्रामीण ने कहा जल निगम हैंडपंप उखाड़ ले जाता है, लेकिन पेयजल की व्यवस्था नहीं की जाती है। जनपद में अभी तक करीब 40 हैंडपंप नहीं उखाड़े जा सके हैं।
दोआबा पर्यावरण समिति ने एनजीटी में हैंडपंप से निकल रहे प्रदूषित जल पर याचिका दाखिल की थी। 413 हैंडपंप के बाद जांच कराई तो 12 गांव में 120 हैंडपंप का पानी प्रदूषित मिला। डीएम ह्दय शंकर तिवारी ने इन जगहों से हैंडपंप उखाड़ने के लिए टीमें गठित की, लेकिन जगह-जगह विरोध होने के कारण अभी तक केवल 85 हैंडपंप ही उखाड़े जा सके हैं।
ग्रामीणों ने बताया प्रशासन की टीम गांव में आती है और हैंडपंप उखाड़कर ले जाती है, लेकिन पेयजल के लिए कोई व्यवस्था नहीं की जाती है। यही कारण है कि अब टीम को विरोध का सामना करना पड़ रहा है। जल निगम के अधिकारियों ने इस मामले की रिपोर्ट डीएम ह्दय शंकर तिवारी को भेजी है।
होना चाहिए पेयजल का इंतजाम
जिवाना गुलियान के प्रधान आदित्य सोलंकी कहते हैं कि प्रशासन को पानी के बेहतर इंतजाम की व्यवस्था करनी चाहिए। पारा 42 डिग्री के पार पहुंच गया है, इस कारण अधिक परेशानी हो रही है। प्रत्येक गांव में बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए।
सपा नेता विजय राणा कहते हैं कि चौगामा क्षेत्र में पेयजल की अधिक समस्या हैं। लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।
बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए। कई गांव ऐसे हैं, जहां ग्रामीण अपने स्तर से सबमर्सेबिल लगवा रहे हैं।