बड़ौत। अष्टानिका पर्व के पांचवें दिन श्री अजितनाथ दिगंबर जैन प्राचीन मंदिर में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान में बुधवार को इंद्र-इंद्राणी द्वारा 128 अर्घ्य समर्पित किए गए।
विधानाचार्या डॉ. श्रेयांस जैन के निर्देशन में जैन श्रद्धालुओं ने जिनेंद्र भगवान की मूर्ति का विनय भाव से अभिषेक किया। शांतिधारा का सौभाग्य सौधर्म इंद्र दिनेश जैन को प्राप्त हुआ। संगीतकार संजय जैन, एंबेसी म्यूजिकल ग्रुप दिल्ली के गाए भजनों ने वातावरण में विशेष ऊर्जा भर दी। इंद्र-इंद्राणियों ने नृत्य के साथ प्रभु के चरणों में भक्ति प्रस्तुत की। नित्य नियम पूजन में समुच्चय देव शास्त्र गुरु पूजन, भगवान शांतिनाथ पूजन, भगवान महावीर का पूजन किया गया। श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान की पूजन में सौधर्म इंद्र द्वारा सिद्ध भगवान की पूजा की गई। वहीं, 128 अर्घ्य समर्पित किए गए।
रात्रि में मंदिर में आरती, प्रश्नमंच और बच्चों की फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें छोटे-छोटे बच्चों ने प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। विधान में दिनेश जैन, अंकुर जैन, शुभम जैन, रश्मि जैन, विपिन जैन, डिंपल, इंद्राणी, अतिशय, रजनी, सरला, वरदान, सतीश, राजेश, वकील चंद आदि उपस्थित रहे।
वहीं, श्री 1008 पार्श्वनाथ मंदिर नेहरू रोड में श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ मंदिर कमेटी के तत्वावधान में चल रहे अष्टानिक महापर्व के पांचवें दिन श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान में 128 अर्घ्य चढ़ाए गए। बुधवार को पंडित नरेश जैन के सानिध्य में सौधर्म इंद्र संजय जैन, रश्मि जैन व यज्ञनायक जयपाल जैन, शकुंतला जैन व धनपति कुबेर निशु जैन, माही जैन द्वारा रत्न वर्षा की गई। सर्वप्रथम श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा, भक्तामर पूजा व विधान किया गया। जिसके पश्चात श्री सिद्धचक्र विधान की पूजा में मांडले पर चौसठ ऋद्धि के 128 अर्घ्य चढ़ाए गए। विधानाचार्य नरेश जैन ने धर्मोपदेश रात्रि में श्री जी संगीतमयी भव्य आरती की गई। जिसमें सतीश जैन व प्रदीप जैन के मधुर भजनों पर भक्त झूमे। इस अवसर पर विधान में सत्येंद्र जैन, अनिल जैन, आदीश जैन, रवि जैन, अमन जैन के समस्त पुजारी व दर्शनार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया तथा पुण्य लाभ लिया।