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डायरिया पसार रहा पांव, बच्चों का रखें ख्याल

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बड़ौत में रेलवे रोड़ स्थित बच्चों के अस्पताल में लगी बच्चों की भीड़। - फोटो : BARAUT
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सीएचसी समेत निजी अस्पतालों में बढ़े डायरिया से ग्रसित बच्चे
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मौसम के उतार-चढ़ाव से खांसी, जुकाम एवं बुखार के मरीज बढे़
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। मौसम में परिवर्तन से सीएचसी समेत निजी अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ रही है। वहीं, बच्चों में जलजनित रोग डायरिया की शिकायत मिल रही है। बुजुर्गों में खांसी और बुखार आदि के मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं। बड़ौत सीएचसी के पूर्व अधीक्षक व बाल रोग विशषेज्ञ डॉ. अजेंद्र मलिक और रेलवे रोड स्थित मलिक नर्सिंग होम के चिकित्सक डॉ. जितेंद्र मलिक ने बताया कि गर्मी में बच्चों का खास ख्याल रखने की जरूरत है।
बच्चों को उल्टी-दस्त, पेट दर्द के साथ बुखार ने चपेट में लेना शुरू कर दिया है। चिकित्सकों का कहना है कि ज्यादातर बच्चों में बीमारी का मुख्य कारण गंदगी और दूषित पेयजल है। बच्चे जमीन खेलते हैं और वे कोई भी वस्तु मुंह में ले लेते हैं। इसलिए बच्चों के खानपान एवं उनकी सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बच्चों को बाहर की चीजें खाने के लिए न देकर घर पर बना ताजा भोजन दें।
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बुखार, खांसी समेत अन्य बीमारी
सीएचसी अधीक्षक डॉ. विजय कुमार ने बताया कि मौसम परिवर्तन हो रहा है। ऐसे में ओपीडी में बुखार, खांसी व पेट की बीमारी के मरीजों की संख्या बढ़ी है। ज्यादातर 50 से ऊपर उम्र के मरीज आ रहे हैं।
यह है मुख्य कारण
- अधिक गर्म, नमी युक्त वातावरण एवं दूषित खान पान।
- डायरिया का कारण रोटा वायरस है। इसलिए संपूर्ण टीकाकरण कराएं।
- शुद्ध पेयजल पीएं।
- बच्चों को मिलावटी दूध एवं बाजार में खुुली बिकने वाली चीजें खिलाना।
ये ख्याल रखें।
- छह माह तक के शिशु को मां के दूध के सिवा कुछ न दें।
- इससे अधिक उम्र के बच्चों को ओआरएस या फिर नींबू, नमक व चीनी का घोल दें।
- दाल का पानी, चावल का मांड, दही-केला एवं हल्का सुपाच्य भोजन दें।
- नारियल पानी पिलाएं।
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