रेलवे सिस्टम पर सवाल खड़े हैं। एक तरफ यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे किए जा रहे, लेकिन दूसरी तरफ संसाधनों का टोटा साफ दिखता है। सूजरा हाल्ट पर रस्सी का रेलवे फाटक सिस्टम की पोल खोलने के लिए पर्याप्त है।
मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग पर ट्रेन आने के दौरान दोनों तरफ लोगों को रोकने के लिए रेलवेकर्मी रस्सी लेकर खड़ा हो जाता है। दिन में रस्सी वाला फाटक लगता है, लेकिन रात में यह व्यवस्था भी नहीं है।
ऐसे में नौरोजपुर गुर्जर गांव के मार्ग से गुजरने वाले वाहन हादसे का शिकार हो सकते हैं। ग्रामीणों ने कहा एक बार नहीं, कई बार जनप्रतिनिधियों और रेलवे से फाटक के निर्माण की मांग की, लेकिन सिस्टम बेपटरी है। मानव रहित रेलवे फाटक पर कई बड़े हादसे हो चुके हैं।
ब्राह्मण पुट्ठी गांव के पास मानव रहित फाटक पर ट्रेन की चपेट में कार आ गई थी। एक परिवार के तीन सदस्य की जान गई थी। सूजरा हाल्ट पर कई हादसे हो चुके हैं। ग्रामीणांे का कहना है कि वे कई बार ऐसी रेलवे क्रासिंग पर फाटक बनवाने की मांग कर चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
उधर, दिल्ली-सहारनपुर रेल मार्ग पर 12 ट्रेनों का संचालन होता है। शामली-दिल्ली पैसेंजर, सहारनपुर-दिल्ली पैसेंजर, शामली डीईएमयू, बड़ौत-दिल्ली डीईएमयू और दिल्ली से हरिद्वार जाने वाली पैसेंजर ट्रेन समेत कुल यहां 12 ट्रेन संचालित हैं। इसके अलावा कई मालगाड़ी भी चलती है।
क्या कहते हैं रेलयात्री
नौरोजपुर गांव के दीपक का कहना है कि मानव रहित फाटक के कारण कई लोगों की जान जा चुकी हैं, लेकिन आज भी समस्या जस की तस है। सूजरा गांव के राजवीर का कहना है कि फाटक लगा होने से दूर से ही पता चल जाता है कि ट्रेन आने वाली है। फाटक होना चाहिए।
सूजरा के लोकेश का कहना है कि रस्सी से वाहन नहीं रुकते हैं। इस कारण यहां पर विवाद रहता है। कई बार झगड़ा भी हो जाता है। बड़ौत के कृष्णपाल के अनुसार मानव रहित फाटक हादसों को न्यौता देता है। लाइन पर कोई भी मानव रहित फाटक न रहे।