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परशुराम ने किया था तप, इसलिए दौड़े आते हैं भक्त

Wed, 14 Feb 2018 01:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
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पुरा महादेव मंदिर में जल चढ़ाने के बाद मंदिर की परिक्रमा करता कावंड़िया।  - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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पुरा गांव के श्री परशु रामेश्वर महादेव मंदिर को लेकर कथाएं प्रचलित हैं। शिव के भक्तों की आस्था के केंद्र को लेकर मान्यता है कि कभी परशुराम ने यहां तप किया था। श्रद्धालु इसे भगवान शंकर के ज्योतिर्लिंगों की तरह ही मानते हैं। हरिद्वार से गंगाजल लाकर साल में दो बार शिवलिंग पर जलाभिषेक किया जाता है।
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कथा प्रचलित है कि भगवान परशुराम के पिता जमदग्नि ऋषि की तपस्या करते समय राजा सहस्रबाहु के पुत्रों ने हत्या कर दी थी। इसके बाद परशुराम ने इसी स्थान पर तपस्या की। किसी ऋषि ने उनसे कहा कि यह स्थान अब अपवित्र हो गया है।

तब परशुराम हरिद्वार गए और वहां मां गंगा की गोद में पड़े पत्थरों में से एक पत्थर को पुरा (तब कजरी वन) लाने की प्रार्थना की, लेकिन सबने मां गंगा को छोड़कर आने से मना कर दिया। आग्रह पर एक पत्थर तैयार हुआ, पर इसने अपने को गंगा से अलग न होने की बात कही।
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तब भगवान परशुराम ने कहा कि एक वर्ष में दो बार फाल्गुन माह और श्रावण माह में भविष्य की पीढ़ी तुम्हें गंगाजल में नहलाएगी। जो ऐसा नहीं करेगा उसकी यात्रा सफल नहीं होगी। इसके बाद परशुराम ने यहां शिवलिंग की स्थापना की। 

मंदिर के जीर्णोद्धार की एक कथा यह भी

कथा प्रचलित है कि काफी दिन तक मंदिर खंडहर में तब्दील रहा। एक दिन लंढौरा के राजा राम दयाल की पत्नी इस क्षेत्र में घूमने पहुंची, तो उसका हाथी पुरा गांव में आकर बैठ गया। काफी प्रयास के बाद भी हाथी नहीं उठा तो रानी ने उस जगह को खोदने का आदेश अपने सैनिकों को दिया।

खोदने पर वहां एक शिवलिंग प्रकट हुआ, तब रानी ने वहा मंदिर का निर्माण कराया। मंदिर समिति के उपाध्यक्ष एडवोकेट सुरेंद्र यादव बताते हैं कि इसी जगह पर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी कृष्ण बोधाश्रम ने भी तपस्या की थी। मंदिर को जगतगुरु शंकराचार्य माधवाश्रम जी महाराज ने ही परशु रामेश्वर महादेव मंदिर नाम दिया है।
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