फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अधूरी रह गई परमवीर की सियासी ख्वाहिश

विज्ञापन
विज्ञापन
अधूरी रह गई परमवीर की सियासी ख्वाहिश
विज्ञापन

बागपत। अपराध की दुनिया में शातिर और खौफनाक अंदाज से पहचान बनाने वाले परमवीर तुगाना का सियासी ख्वाब अधूरा रह गया। जिला पंचायत चुनाव की तैयारी में जुटे परमवीर की हत्या कर दी गई। उसके परिवार का सियासत से नाता रहा है। परमवीर की मां छपरौली की ब्लॉक प्रमुख रहीं, जबकि भाई गांव का प्रधान रहा है। इस बार सियासत में खुद परमवीर हाथ आजमाने के लिए तैयार था। यही वजह है कि भाजपा के कुछ नेताओं से वह करीबी बढ़ा रहा था।
परमवीर तुगाना की मां वीरमति छपरौली की ब्लॉक प्रमुख रहीं। भाई और भाभी वर्षा को गांव की प्रधान चुना गया था। लेकिन इस बार जिला पंचायत के चुनाव में वार्ड छह से परमवीर और उसका भाई कृष्णवीर तैयारी कर रहे थे। सोशल मीडिया पर संभावित दावेदारी का प्रचार शुरू हो गया था। क्षेत्र में लोगों से मिलने के लिए खुद परमवीर जाने लगा था। परमवीर का ख्वाब था कि वह जिला पंचायत अध्यक्ष पद की कुर्सी तक पहुंचे। लेकिन 22 जून को हमले के बाद सोमवार को परमवीर की अस्पताल में मौत हो गई।
विज्ञापन

एक लाख के इनामी की हत्या में आया नाम
एक लाख के इनामी रहे प्रमोद गांगनौली की हत्या में परमवीर तुगाना का नाम आया था। प्रमोद के परिवार ने नामजदगी नहीं की थी, लेकिन पुलिस की जांच में सामने आया था कि परमवीर और उसके साथी एक लाख के इनामी अजीत उर्फ हप्पू ने मिलकर लूंब गांव के जंगल में प्रमोद की हत्या की थी। पुलिस से लूटी गई एके 47 भी प्रमोद के पास थी, जिसका आज तक सुराग नहीं लग सका है।
उदयपुर से गिरफ्तार हुआ था परमवीर
राजस्थान के उदयपुर जिले से एसटीएफ ने परमवीर को गिरफ्तार किया था, जब उस पर 50 हजार रुपये का इनाम था। तब दोहरे हत्याकांड के आरोप में वह तीन साल से फरार चल रहा था।
उधम की भांजी से प्यार करने पर हुई अदावत
परमवीर तुगाना ने 20 साल पहले दिल्ली में रहकर प्रापर्टी डीलिंग का काम शुरू किया था। एक युवक के माध्यम से यहां उसकी मुलाकात मेरठ के करनावल निवासी उधम सिंह से हुई। दोनों अपराध की दुनिया में एक के बाद एक वारदात अंजाम दे रहे थे। इस बीच उधम सिंह की भांजी से परमवीर का प्रेम प्रसंग चलने लगा। दोनों घर से गायब हो गए। पुलिस की मानें तो उधम सिंह ने अपनी भांजी की तलाश कर हत्या कर दी और हत्या का मुकदमा परमवीर के खिलाफ दर्ज करा दिया था। यहीं से दोनों के बीच अदावत शुरू हुई। उधम सिंह गैंग से बचने के लिए वह प्रमोद गांगनौली के गैंग में शामिल हो गया था, लेकिन यहां भी वह ज्यादा दिन तक गैंग के सदस्यों में मिलकर नहीं रह पाया।
विज्ञापन

खूनी खेल में माहिर था परमवीर तुगाना
परमवीर तुगाना ने 13 नवंबर 2013 को छपरौली में दिनदहाड़े पुलिस सुरक्षा के बीच दो गवाहों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। सबसे पहले साल 2002 में छपरौली थाने में उसके खिलाफ जानलेवा हमले का मुकदमा दर्ज हुआ था। 2007 में मेरठ के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में अलग-अलग दो हत्याएं कीं। 2014 में तो उसने चार लोगों को मौत के घाट उतारा। 12 अगस्त 2014 को परमवीर ने अपने साथियों के साथ मिलकर बड़ौत तहसील के सब रजिस्ट्रार राम किशोर और उनके पड़ोसी राजवीर की उनके आवास पर हत्या की। गांगनौली गांव के किसान राजेंद्र के बेटे पप्पू को गोलियों से भूना। इन सब वारदातों के मुकदमे उस पर दर्ज हुए। उसके खिलाफ सात हत्या, पांच जानलेवा हमले, एक अपहरण समेत 25 मुकदमे दर्ज हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें