बागपत। देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के नायक बाबा शाहमल की धरती बिजरौल में जन्में पूर्व सैनिक चंद्रपाल सिंह ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना के शौर्य एवं पराक्रम से गौरवान्वित हैं। अब एक बार फिर उनकी आंखों के सामने 54 साल पुराना युद्ध का वह घटनाक्रम घूमने लगा, जब वह साथी सैनिकों के साथ पाकिस्तान पर कहर बनकर टूट पड़े। घायल होने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी हौसला बढ़ाने आईं तो उन्होंने एक पैर पर खड़े होकर सेल्यूट किया जय हिंद...।
बिजरौल गांव निवासी चंद्रपाल सिंह के खून में देशभक्ति जन्म से ही दौड़ रही है। वह 1966 में बड़ौत में कक्षा 10 की परीक्षा का पेपर देकर घर लौटने के बजाय रमाला में सिंचाई विभाग के डाक बंगले में चल रही भर्ती में शामिल होकर सेना में भर्ती हो गए।
परिजनों को इसलिए नहीं बताया कि इससे पहले एक बार बड़ौत में हुई भर्ती में जाने से उनको रोक दिया था। वह बताते हैं कि सेना में प्रशिक्षण लिया और असम में तैनात रहे। उन्हें मेहनत एवं निगाहबानी से ऑनरेरी नायक का पद मिला। वर्ष 1971 में पाकिस्तान के साथ युद्ध हुआ।
इस युद्ध में वह अपने साथी सैनिकों के साथ जम्मू-कश्मीर के राजौरी पुंछ सेक्टर में अग्रिम मोर्चे पर मशीनगन, राइफल से दुश्मन पाकिस्तानी सैनिकों पर कहर बनकर टूट पड़े। बताया कि हम हमला करके बंकर में लौट रहे थे, तभी अचानक से बारूदी सुरंग फटने से जोरदार विस्फोट हुआ।
वह न केवल घायल हुए, बल्कि विस्फोट से उनका सीधा पैर भी कट गया। गोलियों की बौछार और बमों के हमलों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और बंकर में पहुंचने में सफल रहे। साथी सैनिकों ने उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
इसके बाद सैनिक अस्पताल में भर्ती कराया गया। पैर व शरीर के अन्य जख्म भरने के बाद उन्हें सेना अस्पताल की उस विंग में शिफ्ट किया गया, जहां कृत्रिम पैर लगाना था। वह बताते हैं कि तब घायल सैनिकों से मिलने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी अस्पताल आई। इंदिरा गांधी हर सैनिक के पास पहुंची और हालचाल जाना।
इंदिरा गांधी ने हाथ मिलाकर हौसला बढ़ाया। पैर लगने के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद उनकी ड्यूटी कार्यालय में रही। वर्ष 1980 में सेना से सेवानिवृत्त हुए। बोले कि देश सेवा से बढ़कर कुछ भी नहीं। पहलगाम घटना के बाद जिस तरह भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर चलाकर पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद किया, उसके लिए सेना तथा सरकार बधाई की पात्र है।