बागपत। सिनौली गांव निवासी सुनील मान ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में केस दायर किया था। इसमें बीमा कंपनी व बैंक को बीस लाख रुपये तथा वाद खर्च पांच हजार रुपये अदा करने का आदेश दिया है।
सुनील ने बताया था कि उसके पिता चंद्रपाल सिंह व माता हरबीरी का भारतीय स्टेट बैंक बड़ौत में बचत खाता था। उसके पिता चंद्रपाल ने वर्ष 2014 में भारतीय स्टेट बैंक के माध्यम से एसबीआई जनरल बीमा से बीस लाख रुपये का किसान दुर्घटना बीमा कराया था। बीमा कंपनी का कार्यालय मुंबई में स्थित है। उसकी किस्त नियमित खाते से निकाली गई। 8 मार्च 2015 को उसके पिता धर्मपाल का शव खेत में पड़ा मिला था। इसके बारे में जानकारी करने पर पता चला कि अज्ञात वाहन की टक्कर या आवारा पशु के कारण दुर्घटना में मौत हुई थी। उस वक्त उनको अपने पिता की पॉलिसी के बारे में जानकारी नहीं थी। इस कारण पिता की मौत के मामले में पोस्टमार्टम या पुलिस कार्रवाई नहीं की गई। बैंक की पासबुक से किस्त कटने पर पॉलिसी के बारे में पता चला तो उसने बीस लाख रुपये का दावा किया। उसे चक्कर कटाने के बावजूद बीमा की राशि नहीं मिली। इस मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष रामकरन व सदस्य राजीव कुमार ने मृत्यु दावा की धनराशि बीस लाख रुपये व वाद खर्च पांच हजार रुपये देने के बैंक व बीमा कंपनी को आदेश दिए हैं।