बागपत। यहां अपराध भले ही एक जैसा हो मगर सजा अलग-अलग तरह की मिलती है। गांवों में विकास कार्यों में घपला करने वाले एक सचिव को निलंबित कर दिया गया तो दूसरे को ब्लॉक से संबद्ध करके बचा लिया। इस तरह ही पेंशनधारक बुजुर्गों को जांच के दौरान कागजों में मारने वाले एक सचिव को निलंबित किया गया तो दूसरे को चेतावनी दी गई।
यहां सचिवों के खिलाफ कार्रवाई में यह खेल कोई ओर नहीं बल्कि अधिकारी ही कर रहे हैं। वह एक जैसा अपराध करने पर अपने चहेतों को बचा लेते हैं और दूसरों के खिलाफ कार्रवाई कर देते हैं। यहां इस तरह का कोई एक नहीं बल्कि पिछले एक सप्ताह में कई मामले हो गए। अधिकारियों की इस कार्यप्रणाली पर अब सवाल उठने लगे हैं।
सरूरपुरकलां का सचिव निलंबित तो बसौद के सचिव को बचा लिया
सरूरपुरकलां गांव में विकास कार्यों में घपले की शिकायत पर जांच कराई गई। वहां 32 लाख रुपये सफाई पर खर्च दिखाकर खाते से निकाले गए थे। वहां के सचिव उपदेश को पिछले महीने निलंबित कर दिया गया। इस तरह ही बसौद गांव में विकास कार्यों में घपले की शिकायत होने पर जांच हुई। वहां सड़क बनाने से पहले ही खाते से पांच लाख रुपये निकाल लिए गए थे। इसकी जांच रिपोर्ट भी डीएम के पास पहुंच गई मगर जिला विकास अधिकारी राहुल वर्मा ने सचिव कुबेर खोखर को तीन दिन पहले पिलाना ब्लॉक से संबद्ध कर दिया।
- निरपुड़ा का सचिव निलंबित तो ट्योढ़ी वाले को चेतावनी
समाज कल्याण विभाग ने बुजुर्गों की पेंशन का सत्यापन कराया तो निरपुड़ा गांव के सचिव मोहित उज्ज्वल ने बुजुर्ग महिला कमलेश को कागजों में मृत दिखा दिया। उसकी पेंशन बंद होने पर वह अधिकारियों के पास पहुंची तो इसका खुलासा हुआ। इसमें सचिव मोहित उज्ज्वल की लापरवाही मानते हुए उसे पांच दिन पहले निलंबित कर दिया गया। इस तरह ही ट्योढ़ी के बुजुर्ग प्रकाश चंद को सचिव संदीप ने कागजों में मृत दिखा दिया। प्रकाश चंद के अधिकारियों के पास पहुंचने पर इसका खुलासा होने पर जांच हुई। इसके बाद भी सचिव संदीप को केवल चेतावनी देकर अधिकारियों ने बचा लिया। सिसाना गांव के सचिव सूरज ने भी ओमकारी को मृतक दिखाया हुआ है। सचिव सूरज को बचाते हुए चेतावनी की खानापूर्ति कर दी गई।
- ग्राम विकास व पंचायत अधिकारियों में हो रहा भेदभाव
यहां अधिकारियों ने ग्राम विकास व पंचायत अधिकारियों के बीच भेदभाव करना शुरू कर दिया है। ग्राम विकास अधिकारियों पर अधिकारी कुछ ज्यादा मेहरबानी दिखा रहे हैं और यही कारण है कि ग्राम विकास अधिकारी कुबेर खोखर को पिलाना से संबद्ध किया गया। इस तरह ही ग्राम विकास अधिकारी कुमारी शैंकी को दो महीने पहले किशनपुर बराल गांव में रहते हुए जिंदा को मृत दिखाने पर केवल प्रतिकूल प्रविष्टि देकर बचा लिया गया था।
इस तरह से घपला व पेंशन सत्यापन में गड़बड़ी करने वालों पर कार्रवाई में भेदभाव करने की जानकारी नहीं थी। ऐसा हो रहा है तो यह सही नहीं है। इसको दिखवाकर सभी के खिलाफ एक जैसी कार्रवाई होगी। - अस्मिता लाल, डीएम