विवेचक मुजफ्फरनगर में तैनात, मेरठ भेज दिया गिरफ्तारी वारंट
बागपत। पुलिस की लापरवाही का एक और मामला सामने आया है। पूर्व प्रधान ओमपाल सिंह हत्याकांड के विवेचक पवन कुमार शर्मा मुजफ्फरनगर में तैनात हैं, लेकिन गिरफ्तारी वारंट मेरठ में तैनात दूसरे पीके शर्मा को भेज दिया गया। वारंट मिला तो मेरठ से इंस्पेक्टर पीके शर्मा ने अदालत पहुंचकर इसकी जानकारी दी। अब दोबारा से सही पते पर मुजफ्फरनगर गिरफ्तारी वारंट भेजा गया। वहीं दूसरे गवाह एसआई रामकिशन शर्मा ने अदालत पहुंचकर अपनी गवाही पूरी करा दी। अगली सुनवाई सात फरवरी को होगी।
किशनपुर बिराल गांव में 24 जून 2012 को पूर्व प्रधान ओमपाल सिंह (42) की गोली मारकर और ईंटों से सिर कुचलकर हत्या कर दी गई थी। मृतक के भाई विजय ने गांव के ही एविज, अजय, राजीव और रूपेश के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की। ट्रायल एडीजे चतुर्थ कृष्ण कुमार की अदालत में चल रहा है। शुक्रवार को सिंघावली अहीर थाने में तैनात एसआई रामकिशन शर्मा ने गवाही दी। दूसरे गवाह इंस्पेक्टर पीके शर्मा ने कोर्ट पहुंचकर जानकारी दी कि वह मुकदमे में विवेचक नहीं हैं। रमाला थाने के पैरोकार जगदीश का कहना है कि गिरफ्तारी वारंट मुजफ्फरनगर में तैनात इंस्पेक्टर पवन कुमार शर्मा को भेजा जाना था। लेकिन वह गलती से मेरठ में तैनात इंस्पेक्टर पवन कुमार शर्मा को चला गया। शुक्रवार को इसमें सुधार कर दिया गया। अब अगली सुनवाई सात फरवरी को होनी है। एसआई की गवाही करा दी गई है।
गिरफ्तारी वारंट भेजने पर आए गवाह
अभियोजन पक्ष ने बताया कि 17 अक्तूबर 2013 के बाद से मुकदमे में गवाही नहीं हो सकी थी। गवाहों को बुलाने के लिए अदालत ने पहले समन भेजे थे। नहीं आए तो फिर गिरफ्तारी वारंट भेजे गए। इसके बाद गवाह पेश हुए।
कौन कहां तैनात
रमाला थाने के पैरोकार जगदीश ने बताया कि हत्या के विवेचक पवन कुमार शर्मा मुजफ्फरनगर में तैनात हैं। दूसरे विवेचक ओमप्रकाश शर्मा गाजियाबाद में हैं। दफा 25 में विवेचक अमीन खां बुलंदशहर में हैं।
रंजिश में हत्या, हिस्ट्रीशीटर था ओमपाल
किशनपुर बिराल का पूर्व प्रधान ओमपाल सिंह रमाला थाने का टॉप फाइव हिस्ट्रीशीटर था। रंजिश में उसकी हत्या की गई थी। ट्रायल के दौरान एक हत्यारोपी की मौत हो चुकी है। ओमपाल सिंह पर चार हत्याओं समेत 12 मुकदमे दर्ज थे। साल 2003 में छपरौली में युवक की हत्या कर जरायम की दुनिया में उसने कदम रखा था।