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सिद्धचक्र महामंडल विधान में छठे दिन चढ़ाए दो सौ छप्पन अर्घ्य

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बड़ौत। श्री 1008 पार्श्वनाथ मंदिर नेहरू में श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ मंदिर कमेटी के तत्वावधान में चल रहे अष्टानिक महा पर्व के छठे दिन श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान में बृहस्पतिवार को पंडित नरेश जैन के सानिध्य में दो सौ छप्पन अर्घ्य चढ़ाएं गए। विधानाचार्य नरेश जैन ने कहा पाप और पुण्य किसी भी जन्म में मनुष्य का पीछा नहीं छोड़ते हैं।
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इस मौके पर सौधर्म इंद्र संजय जैन और रश्मि जैन , यज्ञ नायक जयपाल जैन और शकुंतला जैन, धनपति कुबेर नीशु जैन और माही जैन ने रत्न वर्षा की। सर्वप्रथम श्रीजी का अभिषेक, शांति धारा, भक्तामर पूजा व विधान किया। इसके बाद श्री सिद्ध चक्र विधान की पूजा में मंडल पर ऋद्धि के दो सौ छप्पन अर्घ्य चढ़ाए । विधानाचार्य नरेश जैन ने कहा इंसान का जीवन उसके कर्मों के अनुसार पाप और पुण्य के बीच चलता है। जब तक पुण्य कर्म चलता है, तब तक मनुष्य उत्तम जीवन बिताता है, जब पाप कर्म आता है तो अकस्मात उसके ऊपर ऐसी विपत्ति आ जाती है कि मानो ईश्वर किसी घोर दुष्कर्म का दंड दे रहा हो।
उन्होंने कहा कि यह सब अपने अपने कर्मों का पाप पुण्य का फल है, जिसने जैसा बोया, उसको वैसा ही काटना पड़ेगा। इसीलिए हमेशा अच्छे सद्कर्म करो, धर्म करो, पाप कर्म से बचो। रात्रि में श्री जी संगीतमयी भव्य आरती की गई। इसमें सतीश जैन, प्रदीप जैन के मधुर भजनों पर श्रद्धालु जमकर थिरके। इसमें सत्येंद्र जैन, अनिल जैन, आदीश जैन, रवि जैन अमन जैन आदि शामिल रहे।
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