बागपत के बड़ौत में महिलाओं ने पैसे बचाने के लिए क्या-क्या पापड़ नहीं बेले थे, कभी महंगी साड़ी देख मुंह मोड़ा, तो कभी काम वाली को हटाकर खुद सफाई की। पति को महंगा सामान बताकर ज्यादा पैसे निकलवाएं, तो मायके से मिले पैसों को झट से छुपाकर पर्स मेें रख लिया।
हाल ही मेें भैया दूज पर भाई द्वारा दिए करारे नोटों की भेंट भी महिलाओं ने बहुत संभालकर रखी थी। एक-एक नोट पति, बेटे और परिवार के सदस्य के हवाले कर उन्हें ऐसा लगा रहा था, जैसे कोई जबरदस्ती उनकी जमा पूंजी उनसे छीन रहा हो। शनिवार को नगर के बैंकों मेें भी महिलाओं की खासी भीड़ नजर आए।
सिंडिकेट बैंक मेें पैसा जमा कराने पहुंची बड़ौत की शालिनी तोमर ने कहा उन्होंने एक-एक पैसा बड़ी मुश्किल हो मुसीबत के लिए जोड़ा था, लेकिन पता नहीं था कि इतनी जल्द मुसीबत आ जाएगी। प्रभा और रेखा ने कहा भविष्य में पैसा बच्चों के काम आए, किसी तरह एक-एक पैसा एकत्र किया था, लेकिन बडे़ नोट बंद होने से दिक्कत आ रही है।
घर-घर टूटी बच्चों की गुल्लक
बड़ौत। बच्चों की छोटी-छोटी बचत बाहर आई। पांच सौ और हजार के नोट तलाश करते बच्चों की गुल्लक मम्मी- पापा के हाथ लग गई। फिर क्या किसी ने गुल्लक जमीन पर दे मारी, तो किसी ने प्लास्टिक की गुल्लक आरी से काटी। कुछ बच्चों ने विरोध किया, तो नये पैसे का भरोसा दिया।